तमिलनाडु में मुख्यमंत्री नाश्ता योजना का नाम बदलना द्रमुक का श्रेय छीनने जैसा : वेलु
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री नाश्ता योजना का नाम बदलना द्रमुक का श्रेय छीनने जैसा : वेलु
चेन्नई, 18 अगस्त (भाषा) तमिलनाडु में विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने स्कूली बच्चों से संबंधित ‘मुख्यमंत्री नाश्ता योजना’ का नाम बदलने को लेकर सत्तारूढ़ टीवीके सरकार पर निशाना साधा है।
द्रमुक का आरोप है कि राज्य में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार योजना का नाम बदलकर इसका श्रेय द्रमुक से छीनने की कोशिश कर रही है।
पूर्व मंत्री ई वी वेलु ने पिछली द्रमुक सरकार की इस प्रमुख योजना का नाम बदलकर ‘पेरुंथलैवर कामराज नाश्ता योजना’ किए जाने पर विधानसभा में राज्य सरकार पर निशाना साधा।
वेलु ने कहा कि पहले से चल रही सरकारी योजना का नाम बदलकर उसे अपने नाम से फिर शुरू करना उस तमिल कहावत के समान है, जिसमें किसी और के संसाधनों का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करने की आलोचना की जाती है।
द्रमुक नेता ने कहा, ‘‘यह आपका विशिष्ट योगदान कैसे हो सकता है? हम कामराज का सम्मान करते हैं और अगर उनके नाम पर कोई योजना शुरू की जाती तो हमें खुशी होती। हमने (पिछली द्रमुक सरकार ने) तिरुचिरापल्ली में कामराज पुस्तकालय और बौद्धिक केंद्र (कामराज अरिवुलगम) स्थापित किया था।’’
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार नयी पहल शुरू करने के बजाय पिछली सरकार की योजना का केवल नाम बदल रही है।
तमिलनाडु में सत्तारूढ़ टीवीके ने कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कामराज के सम्मान में 22 जुलाई को ‘मुख्यमंत्री नाश्ता योजना’ का नाम बदलकर ‘पेरुंथलैवर कामराज नाश्ता योजना’ कर दिया था। कामराज ने राज्य में स्कूली बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन योजना शुरू करने की पहल की थी। इसका उद्देश्य बच्चों में कुपोषण दूर करना और स्कूल छोड़ने की दर कम करना था।
‘मुख्यमंत्री नाश्ता योजना’ सितंबर 2022 में द्रमुक के अध्यक्ष एम के स्टालिन ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान शुरू की थी।
विधानसभा में वेलु ने कहा कि मूल नाम- ‘मुख्यमंत्री नाश्ता योजना’- जानबूझकर तटस्थ और गैर-पक्षपातपूर्ण रखा गया था।
उन्होंने कहा कि ‘मुख्यमंत्री’ किसी व्यक्ति के बजाय एक संस्थागत पद को दर्शाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सत्ता में चाहे कोई भी राजनीतिक दल हो, योजना का नाम और उसकी निरंतरता बरकरार रहे।
वेलु ने कहा, ‘‘अगर आप कामराज के नाम पर कोई नयी योजना लाते तो हमें खुशी होती।’’
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार स्थापित योजनाओं का नाम बदलने के बजाय नयी पहलों के माध्यम से इस प्रतिष्ठित नेता का सम्मान करे।
भाषा रवि कांत सुरेश
सुरेश

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