बेंगलुरु के पास कृषि भूमि अधिग्रहण के खिलाफ जद (एस) का प्रदर्शन, देवगौड़ा ने संभाली कमान

बेंगलुरु के पास कृषि भूमि अधिग्रहण के खिलाफ जद (एस) का प्रदर्शन, देवगौड़ा ने संभाली कमान

बेंगलुरु के पास कृषि भूमि अधिग्रहण के खिलाफ जद (एस) का प्रदर्शन, देवगौड़ा ने संभाली कमान
Modified Date: August 18, 2026 / 05:44 pm IST
Published Date: August 18, 2026 5:44 pm IST

बेंगलुरु, 18 अगस्त (भाषा) कर्नाटक में प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (जीबीआईटी) परियोजना के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध में जनता दल (सेक्युलर) ने मंगलवार को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन का नेतृत्व पार्टी सुप्रीमो और पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा ने किया।

प्रदर्शन में राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। जद (एस) और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने भी किसानों के समर्थन में प्रदर्शन किया।

केंद्रीय मंत्री और जद (एस) नेता एच. डी. कुमारस्वामी ने कृषि भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों को अपना समर्थन दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार करीब 500 दिनों से आंदोलन कर रहे किसानों की मांगों की अनदेखी कर रही है।

कुमारस्वामी ने कहा कि किसान लगातार सरकार से अपनी जमीन अधिग्रहित नहीं करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने के बजाय ‘अहंकारी’ रवैया अपना रही है।

उन्होंने दावा किया कि प्रभावित क्षेत्र के 80 प्रतिशत से अधिक किसान प्रस्तावित परियोजना के लिए अपनी पैतृक जमीन देने को तैयार नहीं हैं।

कुमारस्वामी ने कहा, ‘यह विशाल रैली किसानों का इस्तेमाल कर हमारी पार्टी को मजबूत करने के लिए नहीं है। किसान सरकार से कह रहे हैं कि एकीकृत शहर या टाउनशिप के नाम पर उनकी जमीन न ली जाए।’

उन्होंने कहा कि जद (एस) ने हमेशा किसानों के हितों का समर्थन किया है और सरकार के फैसले के खिलाफ आयोजित यह रैली किसानों की आवाज के साथ खड़े होने के लिए है।

पार्टी की युवा शाखा के अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार विकास के नाम पर किसानों की जमीन जबरन अधिग्रहित करने की कोशिश कर रही है और रियल एस्टेट के जरिए कमाई के लिए इस परियोजना का इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जद (एस) ने नौ अगस्त को बेंगलुरु के पास बायरामंगला से फ्रीडम पार्क तक पदयात्रा शुरू की थी, लेकिन पुलिस ने कनिमिनिके के पास उसे रोक दिया। तीन दिन के लिए प्रस्तावित पदयात्रा को दो दिन बाद, 10 अगस्त को समाप्त कर दिया गया था।

निखिल ने कहा कि पदयात्रा का इतना प्रभाव पड़ा कि सरकार ‘हिल गई’ और उसने इसे रोक दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को अब किसानों की जमीन जबरन अधिग्रहित करने से बचना चाहिए।

उन्होंने कांग्रेस सरकार पर विकास के नाम पर वित्तीय लाभ कमाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह परियोजना ‘रियल एस्टेट से पैसा कमाने’ के लिए लाई जा रही है।

किसानों और स्थानीय लोगों के विरोध के बीच राज्य सरकार ने ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना को लेकर अलग-अलग राय और सुझावों की समीक्षा के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुहनाथन नरेंद्र की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है।

किसानों और स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद सरकार जीबीआईटी परियोजना के लिए सात गांवों में 5,400 एकड़ से अधिक जमीन के अधिग्रहण को लेकर दो चरणों में अंतिम अधिसूचनाएं जारी कर चुकी है। इस परियोजना को भारत के पहले ‘एआई-संचालित एकीकृत टाउनशिप’ के रूप में विकसित करने की योजना है।

सूत्रों के अनुसार, बिदादी परियोजना के लिए नौ राजस्व गांवों और 16 गैर-राजस्व गांवों में कुल 9,600 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की जरूरत है। राज्य सरकार ने पिछले साल मार्च में क्षेत्र के नौ गांवों में 7,481 एकड़ जमीन अधिग्रहित करने के लिए प्रारंभिक अधिसूचना जारी की थी। आने वाले दिनों में इस संबंध में और अधिसूचनाएं जारी होने की संभावना है।

भाषा राखी मनीषा

मनीषा


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