दुनिया में संघर्षों के बीच नवकार मंत्र का जाप बहुत प्रासंगिक: शाह

दुनिया में संघर्षों के बीच नवकार मंत्र का जाप बहुत प्रासंगिक: शाह

दुनिया में संघर्षों के बीच नवकार मंत्र का जाप बहुत प्रासंगिक: शाह
Modified Date: April 9, 2026 / 05:24 pm IST
Published Date: April 9, 2026 5:24 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को कहा कि पूरी दुनिया के कल्याण के लिए यहां नवकार मंत्र का सामूहिक जाप करना ऐसे समय में बहुत ही सार्थक और प्रासंगिक है, जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न विचारधाराओं को लेकर संघर्ष चल रहे हैं।

‘विश्व नवकार महामंत्र दिवस’ पर आयोजित समारोह को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि मंत्र मनुष्य के जीवन को एक ऊंचे रास्ते की ओर ले जाते हैं, हमारी चेतना को जगाते हैं और नेक इरादों को मज़बूत करते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे दौर में जब दुनिया को शांति की बहुत ज़रूरत है, नवकार मंत्र का सामूहिक जाप माहौल को शुद्ध करने और मन की अशांति को शांत करने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘इससे आपसी समझ, सद्भाव और एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता भी मज़बूत होगी।’’

शाह ने कहा कि नवकार मंत्र की परंपरा हज़ारों सालों से चली आ रही है, जिसमें 24 तीर्थंकरों और उनके अनुयायियों का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

उन्होंने कहा कि हमारे प्रबुद्ध ऋषियों ने पीढ़ियों तक अथक तपस्या करके पूरी मानवता के कल्याण के लिए इन मंत्रों की रचना की है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें इन्हें पूरी श्रद्धा के साथ अपनाना चाहिए और अपने जीवन में भी उतारना चाहिए।’’

उन्होंने नवकार मंत्र को एक निराकार, निष्पक्ष और सार्वभौमिक प्रार्थना बताया, जो समय, जाति, क्षेत्र या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करती। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी समावेशी और सर्वमान्य प्रार्थना बहुत ही दुर्लभ हैं।

शाह के अनुसार, यह प्रार्थना उन महान आत्माओं के गुणों को नमन है, जिन्होंने अपने कर्मों पर विजय प्राप्त की है और आत्म-साक्षात्कार तथा मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया है।

उन्होंने बताया कि इस पवित्र मंत्र में ‘णमो’ शब्द पूर्ण समर्पण का प्रतीक है, जो साधक को अहंकार त्यागने और आत्म-शुद्धि के लिए प्रयास करने का मार्गदर्शन देता है।

शाह ने कहा कि शुरू में यह मंत्र पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से आगे बढ़ता रहा; बाद में इसे शिलालेखों के माध्यम से सुरक्षित रखा गया और अंततः विभिन्न धर्मग्रंथों में शामिल किया गया।

भाषा वैभव पवनेश

पवनेश


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