Iran-America Ceasefire News: इस्लामाबाद में कल ‘युद्धविराम’ के लिए अहम मीटिंग.. इधर ईरान ने बातचीत से पहले रख दी ये बड़ी शर्त, जानें आप भी
Iran-America Ceasefire Latest News: इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका युद्धविराम वार्ता, ईरान ने परमाणु संवर्धन की शर्त रखी, पाकिस्तान में बैठक
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- पाकिस्तान में ईरान-अमेरिका के बीच युद्धविराम वार्ता
- ईरान ने परमाणु संवर्धन को युद्धविराम की शर्त बनाया
- 6 सप्ताह के संघर्ष के बाद तनाव कम करने की कोशिश
इस्लामाबाद: पाकिस्तान शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच उच्च-स्तरीय वार्ता की मेजबानी करने वाला है, जिसका उद्देश्य युद्धविराम को मजबूत करना और पश्चिम एशिया में तनाव को बढ़ने से रोकना है। (Iran-America Ceasefire Latest News) अमेरिका और ईरान बुधवार को दो हफ्ते के लिए एक सशर्त युद्धविराम पर सहमत हो गए। इसके बाद, मतभेदों को सुलझाने और मौजूदा युद्धविराम को एक स्थायी शांति में तब्दील करने के लिए इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच एक बैठक होनी है।
दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडल के बातचीत में हिस्सा लेने के लिए बृहस्पतिवार रात तक इस्लामाबाद पहुंचने की उम्मीद है। पाकिस्तानी गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, अमेरिकी राजदूत के साथ एक बैठक में, नकवी ने उन्हें वार्ता से पहले किए गए सुरक्षा इंतजामों का आश्वासन दिया और कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य ‘‘हमारे खास मेहमान’’ हैं।
‘डॉन’ समाचार पत्र की खबर के अनुसार, मंत्री ने कहा, “सभी विदेशी मेहमानों को हर लिहाज से अभेद्य सुरक्षा मुहैया कराने के लिए एक व्यापक योजना तैयार की गई है।” (Iran-America Ceasefir Latest News) सूत्रों के हवाले से खबर में कहा गया है कि सुरक्षा इंतजाम का जायजा लेने के लिए 30 सदस्यीय अमेरिकी टीम पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुकी है।
ईरान ने रख दी बातचीत से पहले ये बड़ी शर्त
ईरान की परमाणु एजेंसी के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने बृहस्पतिवार को कहा कि यूरेनियम संवर्धन के तेहरान के अधिकार की रक्षा करना अमेरिका के साथ किसी भी युद्धविराम वार्ता के लिए आवश्यक है। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख ने ये टिप्पणियां दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई की स्मृति में तेहरान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कीं।
इस्लामी ने कहा, “यह उन आवश्यक चीजों में से एक है जिनके बारे में कोई बात नहीं करता।” उन्होंने अमेरिका द्वारा ईरान की स्थायी युद्धविराम की 10 सूत्री योजना के एक हिस्से के रूप में (यूरेनियम) संवर्धन को स्वीकार करने से इनकार करने का जिक्र करते हुए यह टिप्पणी की।
ईरान, अमेरिका और इजरायल समेत पूरी दुनिया पर दिखा असर
छह सप्ताह तक चले संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई से हुई और इस संघर्ष में तीनों पक्षों ने एक-दूसरे को गंभीर नुकसान पहुंचाया। (Iran-America Ceasefire Latest News) तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने से वैश्विक तेल, गैस और महंगाई का संकट गहरा गया।
ट्रंप को शुरु में उम्मीद थी कि अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य ताकत तेजी से जीत हासिल कर लेगी और ईरान सरकार को झुकने पर मजबूर कर देगी। लेकिन ईरान अपेक्षा से अधिक मजबूत, संगठित और रणनीतिक रूप से सक्षम साबित हुआ। उसने फारस की खाड़ी और इजराइल में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया और जलडमरूमध्य बंद कर दबाव बनाया।
इस बीच, ट्रंप अपने सहयोगी देशों से अपेक्षित समर्थन हासिल नहीं कर सके। कई देशों ने इस युद्ध को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ मानते हुए इसमें भागीदारी से इनकार कर दिया। अमेरिका के वैश्विक प्रतिद्वंद्वी रूस और चीन ने भी युद्ध का विरोध किया और तनाव कम करने की अपील की। संघर्ष के विस्तार के साथ इजराइल ने लेबनान में हिज़बुल्ला के खिलाफ अभियान तेज कर दिया।
युद्ध की लागत तेजी से बढ़ी। अमेरिका के लिए इसका खर्च प्रतिदिन करीब एक अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे पहले से ही भारी संघीय कर्ज में और इजाफा हुआ। (Iran-America Ceasefire Latest News) वहीं, इजराइल को भी सैन्य संसाधनों और मानवबल की कमी का सामना करना पड़ा। स्थिति मिसाइलों और इंटरसेप्टरों की होड़ में बदल गई, जहां यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया कि पहले किसके संसाधन खत्म होंगे।
अमेरिका में युद्ध को लेकर त्यौरियां तनीं
दूसरी ओर, नेतृत्व पर हमलों और भारी बमबारी के बावजूद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने जवाबी हमले जारी रखे और खाड़ी क्षेत्र तथा इजराइल पर नियमित रूप से मिसाइल और ड्रोन हमले किए। अमेरिका में यह युद्ध धीरे-धीरे अलोकप्रिय होता गया। बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों के असर के चलते करीब 61 प्रतिशत नागरिकों ने इसका विरोध किया और ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट आई।
इन परिस्थितियों में ट्रंप के लिए युद्ध को और तेज करने का वादा निभाना कठिन हो गया। ईरान की सांस्कृतिक, राष्ट्रीय और धार्मिक एकजुटता ने बाहरी दबाव के खिलाफ उसे मजबूत बनाए रखा। युद्ध विराम के बाद व्यापक और स्थायी शांति समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा। ट्रंप के अनुसार, ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव और अमेरिका के 15 सूत्रीय प्रस्ताव के बीच कई मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और यह बातचीत का आधार बन सकता है।
इन प्रस्तावों में सभी मोर्चों पर संघर्ष विराम, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण, प्रतिबंधों को हटाना और शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम को मान्यता देना शामिल है। (Iran-America Ceasefire Latest News) हालांकि, इजराइल ने लेबनान को युद्धविराम के दायरे में शामिल मानने से इनकार किया है।
अब यह डोनाल्ड ट्रंप की जिम्मेदारी है कि वे बेंजामिन नेतन्याहू को साथ लेकर चलें, जिन्होंने लंबे समय से न केवल ईरानी सरकार को कमजोर करने, बल्कि उसे क्षेत्रीय शक्ति के रूप में कमतर करने का प्रयास किया है। ट्रंप के सामने यह एक तरह से चुनौती है। यदि सभी पक्ष ईमानदारी से बातचीत करें, तो क्षेत्र में एक नए संतुलित और सहयोगात्मक सुरक्षा ढांचे की संभावना बन सकती है।
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