‘शतरंज का खेल’, ‘पारियों की हार’ : सैन्य अधिकारियों ने ऑपरेशन सिंदूर का वर्णन इस तरह किया

‘शतरंज का खेल’, ‘पारियों की हार’ : सैन्य अधिकारियों ने ऑपरेशन सिंदूर का वर्णन इस तरह किया

‘शतरंज का खेल’, ‘पारियों की हार’ : सैन्य अधिकारियों ने ऑपरेशन सिंदूर का वर्णन इस तरह किया
Modified Date: May 7, 2026 / 04:02 pm IST
Published Date: May 7, 2026 4:02 pm IST

(कुणाल दत्त)

नयी दिल्ली, सात मई (भाषा) पिछले साल सात मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के बाद से एक साल के भीतर, सैन्य अधिकारियों ने इसकी जटिलताओं का वर्णन करने के लिए कई उपमाओं का इस्तेमाल किया है – दुश्मन की अगली चाल के बारे में अनिश्चितता को दर्शाने के लिए ‘‘शतरंज का खेल’’ से लेकर भारत की जीत की विशालता को उजागर करने के लिए ‘‘पारियों की हार’’ तक।

इस सैन्य कार्रवाई में शुरुआत से ही प्रतीकात्मकता अंतर्निहित थी। इसके नाम के साथ-साथ अब व्यापक रूप से पहचाने जाने वाले ‘लोगो’ से भी एक स्पष्ट संदेश मिलता है।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और इसके कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कई आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे।

ऑपरेशन शुरू करने के बाद, भारतीय सेना ने 7 मई को रात 1:51 बजे ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था, ‘‘#पहलगाम आतंकवादी हमला न्याय मिल गया! जय हिंद!’’

इसके साथ ही एक डिजिटल पोस्टर भी था जिस पर गहरे रंग की पृष्ठभूमि में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लिखा था। ‘सिंदूर’ शब्द के एक ‘ओ’ को सिंदूर से भरे कटोरे के साथ दर्शाया गया था।

बाद में, पाकिस्तान ने भी भारत के खिलाफ हमले शुरू किए और भारत द्वारा किए गए सभी जवाबी हमले भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत ही किए गए।

परमाणु हथियारों से लैस दोनों पड़ोसी देशों के बीच लगभग 88 घंटे तक चला सैन्य संघर्ष 10 मई की शाम उनके बीच एक सहमति पर पहुंचने के बाद रुक गया।

प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान द्वारा संघर्ष के बारे में भारत के आकलन को समझाने के लिए खेल की उपमा का उपयोग किए जाने से लेकर थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी द्वारा सशस्त्र बलों की एकीकृत कार्रवाई को दर्शाने के लिए एक संगीत ऑर्केस्ट्रा का संदर्भ दिए जाने तक, पिछले कई महीनों में लगभग चार दिनों के संघर्ष का संदर्भ अनेक छवियों, विमर्श और भावनाओं के साथ दिया जाता रहा है।

जनरल चौहान ने जून में, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में अपने संबोधन में कहा था कि पाकिस्तान भारत को हजार छोटे-छोटे घावों से घायल करने की रणनीति अपनाता रहा है, लेकिन नयी दिल्ली ने ऑपरेशन सिंदूर से सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ पूरी तरह नयी एक लक्ष्मण रेखा खींच दी है।

संघर्ष में भारतीय सेना को हुए नुकसान के बारे में पूछे जाने पर, सीडीएस ने जवाब दिया था कि ‘‘मान लीजिए आप क्रिकेट टेस्ट मैच में जाते हैं और आप एक ‘पारी की हार’ से जीत जाते हैं… तो फिर विकेट की संख्या, गेंदों की संख्या और खिलाड़ियों की संख्या का कोई सवाल ही नहीं उठता। यह (पाकिस्तान को मिली) ‘पारियों की हार’ है।’’

शीर्ष सैन्य कमांडर के जवाब पर दर्शकों ने जोरदार तालियां बजाई थीं।

कुछ महीनों बाद अगस्त में, जनरल द्विवेदी ने आईआईटी-मद्रास में आयोजित एक समारोह में अपने संबोधन में कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर ‘शतरंज के खेल’ की तरह था, क्योंकि ‘‘हमें नहीं पता था’’ कि दुश्मन की अगली चाल क्या होगी, और हालांकि ‘‘टेस्ट मैच चौथे दिन समाप्त हो गया’’, जो एक लंबा संघर्ष हो सकता था।

आतंकी शिविरों पर किए गए सटीक हमलों के बारे में उन्होंने कहा था कि यह ‘‘व्यापक और अंदर तक किया गया हमला था जहां हमने मुख्य भूभाग पर प्रहार किया, पहली बार हमने मुख्य भूभाग पर प्रहार किया, बेशक, हमारे लक्ष्य आतंकी शिविरों के केंद्र और उनके आका थे’’।

उन्होंने कहा था कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था, और यहां तक ​​कि पाकिस्तान को भी यह उम्मीद नहीं थी कि उसके मुख्य भूभाग पर हमला होगा, तथा यही बात उसके लिए एक ‘‘झटका’’ साबित हुई।

जनरल द्विवेदी ने कहा था, ‘‘लेकिन, क्या हम इसके लिए तैयार थे, हाँ, हम इसके लिए तैयार थे, आने वाले नकारात्मक परिणामों को झेलने के लिए।’’

यह उल्लेख करते हुए कि यह ऑपरेशन किसी भी पारंपरिक मिशन से अलग था, और साथ ही ‘शतरंज के खेल’ की उपमा का उपयोग करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर में हमने जो किया, वह शतरंज खेलने जैसा था। तो इसका क्या मतलब है? इसका मतलब है कि हमें नहीं पता था कि दुश्मन की अगली चाल क्या होगी और हम क्या करने वाले हैं। इसे हम ‘ग्रे ज़ोन’ कहते हैं। ग्रे ज़ोन का मतलब है कि हम पारंपरिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं कर रहे हैं। लेकिन, हम कुछ ऐसा कर रहे हैं जो पारंपरिक प्रक्रियाओं से थोड़ा ही कम है।’’

सात मई को पहली प्रेसवार्ता के दौरान, भारत ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा था कि पहलगाम आतंकी हमले के प्रति उसकी प्रतिक्रिया केंद्रित, आनुपातिक, नपी-तुली और गैर-भड़काऊ है।

सेना प्रमुख ने 17 नवंबर को यहां एक संवाद सत्र में कहा था, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर 1.0 के बारे में मैं कहूंगा कि फिल्म अभी शुरू भी नहीं हुई थी, केवल एक ट्रेलर दिखाया गया था, और 88 घंटे बाद ट्रेलर पूरा हो गया।’’

कुछ दिन बाद दिल्ली स्थित एक प्रबंधन संस्थान के दीक्षांत समारोह में, जनरल द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को एक ‘‘भरोसेमंद ऑर्केस्ट्रा’’ के रूप में वर्णित किया, जहां प्रत्येक संगीतकार ने ‘‘समानांतर या तालमेल के साथ भूमिका’’ निभाई, और इसी तरह भारतीय सशस्त्र बलों ने 22 मिनट में नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया।

पहलगाम हमले के बाद भारतीय राजनीतिक नेतृत्व ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ‘‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’’, और बाद में कई सैन्य अधिकारियों ने भी पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि के निलंबन का जिक्र करते हुए इस बात को दोहराया।

जून में, यहां आयोजित एक कार्यक्रम में एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख (सीआईएससी), एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा था कि संघर्ष के दौरान दुश्मन को ‘‘भारी’’ नुकसान पहुंचाया गया और 88 घंटे इस बारे में बहुत कुछ बताते हैं।

हाल में पहलगाम हमले की पहली बरसी पर, सेना ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि था भारत के खिलाफ किसी भी कृत्य पर ‘‘हर हाल में जवाब दिया जाएगा’’। इसने एक डिजिटल पोस्टर भी जारी किया था जिसमें वर्दी पहने तीन सशस्त्र सैनिक एक-दूसरे के बगल में खड़े थे, जिसके पीछे एक बड़ा लाल घेरा बना हुआ था, और कैप्शन था- ‘‘ऑपरेशन सिंदूर जारी है…’’।

भाषा

नेत्रपाल नरेश

नरेश


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