बेनाम, स्टेशन पर लावारिस मिले बच्चे को मिला नया परिवार: नया जीवन शुरू करने गोवा रवाना

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बेनाम, स्टेशन पर लावारिस मिले बच्चे को मिला नया परिवार: नया जीवन शुरू करने गोवा रवाना

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  • Publish Date - July 22, 2026 / 09:22 PM IST,
    Updated On - July 22, 2026 / 09:22 PM IST

भद्रक (ओडिशा), 22 जुलाई (भाषा) ओडिशा के एक आठ वर्षीय बच्चे, जिसकी न तो कोई पहचान थी और न ही परिवार, के लिए शुभम और आखिरकार ‘साईं विजयनाथ’ बनने का सफर तीन साल के लंबे इंतजार के बाद पूरा हुआ।

बिना नाम-पते के रेलवे स्टेशन पर मिले इस बच्चे को अब गोवा के एक दंपत्ति ने गोद ले लिया है, जिससे उसे एक नया घर और परिवार मिल गया है।

स्थानीय जिला बाल संरक्षण इकाई के सामाजिक-सह-कानूनी अधिकारी सुब्रत दास ने बताया कि बच्चे को वर्ष 2023 में भद्रक रेलवे स्टेशन से लावारिस स्थिति में बचाया गया था। उस समय वह एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के पास बैठा था। न तो वह बच्चा और न ही वह ट्रांसजेंडर व्यक्ति बच्चे की पहचान या उसके घर के बारे में कोई जानकारी दे सके।

इसके बाद बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने बच्चे को ‘शुभम’ नाम दिया और उसे कांजियापाल स्थित महापुरुष आश्रम में रखा, जहां 25 अन्य अनाथ बच्चे भी रहते हैं।

भद्रक की बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सुब्रत बिस्वाल ने बताया कि जिला प्रशासन ने बच्चे के माता-पिता की तलाश के लिए समाचार पत्रों और सोशल मीडिया मंचों पर विज्ञापन प्रकाशित कराकर लगातार प्रयास किए। हालांकि, जब कोई सफलता नहीं मिली, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे गोद लेने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के दिशा-निर्देशों के तहत गहन जांच-पड़ताल के बाद गोवा के एम. के. विजयनाथ और गीता विजयनाथ को सबसे उपयुक्त माता-पिता के रूप में चुना गया।

दत्तक ग्रहण से पहले की प्रक्रिया के तहत शुभम ने 15 दिन दंपत्ति के साथ बिताए, जिसके बाद सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं।

अंतिम सुनवाई के लिए बच्चे और उसके नए माता-पिता को भद्रक के जिलाधिकारी दिलीप राउत्रे के समक्ष प्रस्तुत किया गया। मंजूरी मिलने के बाद शुभम को नया परिवार मिला और दंपत्ति ने उसका नया नाम ‘साईं विजयनाथ’ रखा।

भाषा सुमित रंजन

रंजन