न्यायालय ने मणिपुर हिंसा मामलों के लिए विशेष अदालतों का सुझाव दिया

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न्यायालय ने मणिपुर हिंसा मामलों के लिए विशेष अदालतों का सुझाव दिया

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  • Publish Date - July 24, 2026 / 12:12 PM IST,
    Updated On - July 24, 2026 / 12:12 PM IST

नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 2023 में मणिपुर में हुई जातीय हिंसा से जुड़े आपराधिक मामलों की प्रतिदिन सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने का शुक्रवार को सुझाव दिया।

साथ ही, उसने जांच एजेंसियों को लंबित जांच शीघ्र पूरी करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि पीड़ितों को आरोपपत्रों की प्रतियां उपलब्ध करायी जाएं।

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मणिपुर हिंसा से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान इस तथ्य का संज्ञान लिया कि कई पीड़ितों और उनके परिजनों को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) तथा राज्य के विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा दाखिल आरोपपत्रों की प्रतियां अब तक नहीं मिली हैं।

पीठ ने पीड़ितों की ओर से पेश विधिक सहायता वकीलों को आरोपपत्रों की प्रतियां प्राप्त करने के लिए गुवाहाटी उच्च न्यायालय और मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों के कार्यालयों से संपर्क करने की अनुमति दी।

पीठ ने निर्देश दिया कि जांच एजेंसियां एक सप्ताह के भीतर वकीलों को आरोपपत्रों की प्रतियां उपलब्ध कराएं।

आपराधिक मामलों की प्रतिदिन सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने का सुझाव देते हुए पीठ ने राज्य सरकार, एसआईटी और सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से उन मामलों का ब्योरा एकत्र करने को कहा, जिनमें जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। साथ ही, उन मामलों का विवरण भी देने को कहा गया, जिनकी जांच अभी लंबित है।

पीठ ने कहा कि इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि मुकदमों की त्वरित सुनवाई के लिए कितनी विशेष अदालतों की आवश्यकता होगी।

उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर उच्च न्यायालय को जातीय हिंसा के बाद लापता हुए 30 लोगों से जुड़े मामलों पर भी विचार करने को कहा।

पीठ ने सीबीआई, राज्य एसआईटी और न्यायालय द्वारा नियुक्त निगरानी समिति को हिंसा से जुड़े मामलों पर नयी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया। इस समिति की अध्यक्षता महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक दत्तात्रेय पडसलगीकर कर रहे हैं।

तीन मई, 2023 को मणिपुर के पहाड़ी जिलों में बहुसंख्यक मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में आयोजित ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के बाद जातीय हिंसा भड़क उठी थी। तब से अब तक इस हिंसा में 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, कई सौ लोग घायल हुए हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।

भाषा गोला सिम्मी

सिम्मी