Chinese Delegation Meeting With BJP: चीनी प्रतिनिधिमंडल ने BJP-RSS नेताओं से की मुलाकात, टीएस सिंहदेव ने मोदी सरकार पर कसा तंज

Chinese Delegation Meeting With BJP: चीनी प्रतिनिधिमंडल ने BJP-RSS नेताओं से की मुलाकात, टीएस सिंहदेव ने मोदी सरकार पर कसा तंज

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  • Publish Date - January 13, 2026 / 02:28 PM IST,
    Updated On - January 13, 2026 / 02:29 PM IST

Chinese Delegation Meeting With BJP: चीनी प्रतिनिधिमंडल ने BJP-RSS नेताओं से की मुलाकात, टीएस सिंहदेव ने मोदी सरकार पर कसा तंज / Image: X

HIGHLIGHTS
  • चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का औपचारिक प्रतिनिधिमंडल भाजपा मुख्यालय पहुँचा
  • टीएस सिंहदेव ने इस बैठक को 'देशद्रोह' और 'भारत की संप्रभुता के लिए खतरा' बताया
  • डेलिगेशन का नेतृत्व CPC के अंतरराष्ट्रीय विभाग की वाइस मिनिस्टर सुन हाइयान ने किया

नई दिल्ली: Chinese Delegation Meeting With BJP साल 2020 में गलवान घाटी में हुए खूनी संघर्ष के बाद भारत और चीन के रिश्तों में तनाव जैसा महौल बना हुआ है। हालांकि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील और बातचीत लगातार जारी है। लेकिन इस बीच खबर आ रही है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल भारत दौरे पर है और इस दौरान चीनी नेताओं ने भाजपा मुख्यालय का दौरा किया है। चीनी नेताओं और भाजपा की इस बैठक को लेकर छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेता और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने देश की सत्ताधारी पार्टी भाजपा को आड़े हाथों लिया है।

टीएस सिंहदेव का करारा प्रहार

Chinese Delegation Meeting With BJP टीएस सिंहदेव ने अपने अधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी, चीन की सत्ताधारी पार्टी की बीजेपी-RSS से बैठक और उसके अगले ही दिन चीन का भारतीय ज़मीन पर दावा – देश इसका क्या मतलब समझे? क्या बातें हुई? यही कि चीन भारत की सेनाओं में घुसपैठ करता रहे और भारत के प्रधानमंत्री उसे देश के जवानों के बलिदान के बाद भी आँखें मूंद क्लीन चिट देते रहेंगे? या, ये कि चीन पाकिस्तान को भारत के खिलाफ तकनीकी और सैन्य सहायता देता रहेगा, और बदले में मोदी सरकार चीन को मुनाफे का व्यापार देती रहेगी? भारत के घोषित दुश्मन देश, जिसे कभी चुनावी जुमले में मोदी जी लाल-लाल आँखें दिखाना चाहते थे, आज उनसे गुपचुप मिल कर भारत की ही आंखों में धूल झोंक रहे हैं। बात साफ है BJP-RSS भारत की संप्रभुता और लोकतंत्र दोनों के लिए खतरा है – और दुर्भाग्यवश यही आज भारत के इन सत्ताधारियों की सच्चाई है।

 

भाजपा और चीनी नेताओं की बैठक

मिली जानकारी के अनुसार चीनी डेलिगेशन का नेतृत्व सुन हाइयान कर रहे थे, जो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के अंतरराष्ट्रीय विभाग के वाइस मिनिस्टर हैं। उनके साथ चीनी डेलिगेशन के भाजपा दफ्तर पहुंचने की जानकारी बीजेपी के विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाइवाले ने एक्स पर दी। उन्होंने बताया कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के डेलिगेशन के साथ इस बात को लेकर चर्चा हुई कि कैसे संवाद को बढ़ाया जा सकता है।

इस दौरान चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से वार्ता का नेतृत्व भाजपा की ओर से महासचिव अरुण सिंह ने किया। इस बैठक में भारत में चीन के राजदूत शू फेइहॉन्ग भी मौजूद थे। अरुण सिंह ने भी इस बैठक की जानकारी एक्स पर दी है। उन्होंने लिखा, ‘आज भाजपा दफ्तर में सुन हाइयान की लीडरशिप में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का डेलिगेशन आया। इस बैठक के दौरान हमने चर्चा की कि कैसे भाजपा और सीपीसी के बीच संवाद को बढ़ाया जा सकता है।’ ऐतिहासिक रूप से भाजपा और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच एक औपचारिक संवाद वर्ष 2000 से ही जारी रहा।

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भाजपा मुख्यालय आने वाले चीनी डेलिगेशन का नेतृत्व कौन कर रहा था?

चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सुन हाइयान कर रही थीं, जो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) के अंतरराष्ट्रीय विभाग की वाइस मिनिस्टर हैं।

भाजपा और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच हुई बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?

भाजपा के अनुसार, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों राजनीतिक दलों के बीच संवाद (Communication) और इंटरेक्शन को बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा करना था।

टीएस सिंहदेव ने इस बैठक को लेकर क्या गंभीर आरोप लगाए हैं?

टीएस सिंहदेव ने आरोप लगाया कि एक तरफ चीन भारतीय सीमा में घुसपैठ कर रहा है और पाकिस्तान की मदद कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भाजपा सरकार उनसे "गुपचुप" मिलकर देश की आँखों में धूल झोंक रही है।

क्या इस डेलिगेशन ने RSS के नेताओं से भी मुलाकात की?

जी हाँ, खबरों के अनुसार चीनी प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा मुख्यालय के बाद दिल्ली में आरएसएस (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी शिष्टाचार भेंट की है।

भारत और चीन के रिश्तों में यह नरमी कब से देखी जा रही है?

अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और राजनीतिक संवाद में कुछ सहजता आई है।