जयकारों और पर्यावरण-अनुकूल परंपराओं के बीच गोवा में ‘चोवोथ’ पर्व शुरु

जयकारों और पर्यावरण-अनुकूल परंपराओं के बीच गोवा में ‘चोवोथ’ पर्व शुरु

जयकारों और पर्यावरण-अनुकूल परंपराओं के बीच गोवा में ‘चोवोथ’ पर्व शुरु
Modified Date: September 14, 2026 / 11:29 am IST
Published Date: September 14, 2026 11:29 am IST

पणजी (गोवा), 14 सितंबर (भाषा) गोवा के शांत तटीय गांवों से लेकर दूरदराज के इलाकों तक सोमवार को भक्ति और उल्लास का रंग छा गया। परिवारों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अपने आराध्य भगवान गणेश का स्वागत किया और इसी के साथ गोवा में श्रद्धा, आस्था और पारिवारिक मिलन का पर्व ‘चोवोथ’ शुरू हो गया।

सदियों पुरानी परंपराओं में सजा ‘चोवोथ’ ऐसा पर्व है, जब गोवा के पूरे के पूरे गांव भगवान गणेश के स्वागत में एकजुट हो जाते हैं। लोग पर्यावरण अनुकूल तरीके से ‘माटोली’ नामक पारंपरिक वेदियां और सजावटी छत्र तैयार करते हैं, स्थानीय फसलें एक-दूसरे से साझा करते हैं और प्रकृति के साथ अपने गहरे रिश्ते को उत्सव के रूप में अभिव्यक्त करते हैं।

पर्व की तैयारियों के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले परिवार कई दिन पहले ही अपने पैतृक घर लौटने लगे। घरों की साफ-सफाई के बाद उन्हें आकर्षक ‘माटोली’ से सजाया गया। इन पर जंगलों से जुटाए गए मौसमी फलों, जंगली सब्जियों और रंग-बिरंगे फूलों को बेहद खूबसूरती से सजाया गया।

‘चोवोथ’ का पर्व परिवारों की परंपराओं के अनुसार अलग-अलग अवधि तक चलता है। कुछ परिवार डेढ़ दिन बाद गणेश प्रतिमा का विसर्जन करते हैं, जबकि कई परिवारों में यह उत्सव तीन, पांच, सात या उससे अधिक दिनों तक जारी रहता है। पर्व के समापन पर भगवान गणेश की प्रतिमाओं का निकटवर्ती नदियों, झीलों या समुद्र में विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है।

पर्व की पूर्व संध्या पर रविवार को मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए ‘चोवोथ’ को पर्यावरण के अनुकूल, स्थानीय परंपराओं के अनुरूप और हर्षोल्लास के साथ मनाने का आग्रह किया।

सावंत ने लोगों से स्थानीय कारीगरों और छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहित करने की अपील की।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान का उल्लेख करते हुए लोगों से पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं और स्थानीय स्तर पर उगाई गई फसलों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि यह पर्व गोवा की विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का भी अनूठा अवसर प्रदान करता है।

भाषा खारी रंजन

रंजन


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