आरटीआई से हज हाउस खर्च की जानकारी न देने पर केंद्रीय हज कमेटी को सीआईसी की फटकार

आरटीआई से हज हाउस खर्च की जानकारी न देने पर केंद्रीय हज कमेटी को सीआईसी की फटकार

आरटीआई से हज हाउस खर्च की जानकारी न देने पर केंद्रीय हज कमेटी को सीआईसी की फटकार
Modified Date: July 6, 2026 / 08:34 pm IST
Published Date: July 6, 2026 8:34 pm IST

नयी दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने भारतीय केंद्रीय हज समिति को मुंबई स्थित ‘हज हाउस’ के रखरखाव पर हुए खर्च, कमरों के आवंटन और छतरी खरीद के एक ठेके से जुड़ी आरटीआई (सूचना का अधिकार) अर्जी पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है।

आयोग ने कहा कि प्राधिकरण ने सूचना देने से इनकार करने के लिए गोपनीयता छूट संबंधी कानूनी प्रावधानों का गलत इस्तेमाल किया।

भारतीय केंद्रीय हज समिति, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है।

सूचना आयुक्त संजीव कुमार जिंदल ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि हज समिति ने सार्वजनिक खर्च से संबंधित जानकारी को रोकने के लिए सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम की धारा 8(1)(जे) को गलत तरीके से लागू किया। इसके साथ ही समिति आवेदक द्वारा उठाए गए कुछ गंभीर आरोपों पर स्पष्ट जवाब देने में भी विफल रही।

यह मामला एक आरटीआई आवेदन से जुड़ा है, जिसमें हज हाउस के रखरखाव के लिए अग्रिम भुगतान और बिलों के निपटान, अधिकारियों के रिश्तेदारों एवं करीबियों को कथित तौर पर मुफ्त कमरे आवंटित करने, हज 2022 के दौरान छतरी आपूर्ति का ठेका देने और हज समिति के कर्मचारियों से जुड़े कुछ सेवा मामलों की जानकारी मांगी गई थी।

आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(जे) किसी व्यक्ति की निजी या व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक करने से छूट देती है, बशर्ते उसका किसी सार्वजनिक गतिविधि या व्यापक जनहित से कोई संबंध न हो। ऐसी जानकारी तभी दी जा सकती है जब संबंधित प्राधिकारी संतुष्ट हो कि प्रकटीकरण से बड़ा जनहित जुड़ा है।

भाषा सुमित सुरेश

सुरेश


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