सीआईसी ने शीर्ष अदालत के फैसले तक आरटीआई के तहत एनपीए आंकड़ों के खुलासे पर रोक लगाई
सीआईसी ने शीर्ष अदालत के फैसले तक आरटीआई के तहत एनपीए आंकड़ों के खुलासे पर रोक लगाई
(मोहित सैनी)
नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने उच्चतम न्यायालय का अंतिम फैसला आने तक सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत बैंक निरीक्षण रिपोर्टों और ऋण चूककर्ताओं की सूचियों को जारी करने पर रोक लगा दी है।
राष्ट्रीय स्तर पर इसके व्यापक प्रभावों को समझते हुए, पारदर्शिता निगरानी संस्था ने फैसला सुनाया है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा बैंकों की लंबित याचिकाओं पर मंगलवार को निर्णय लिए जाने तक किसी भी गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) का आंकड़ा या जुर्माने के विवरण का खुलासा नहीं किया जाएगा।
आरबीआई निरीक्षण रिपोर्टों के खुलासे पर ऐतिहासिक जयंतीलाल एन मिस्त्री फैसले पर पुनर्विचार की मांग वाली लंबित याचिकाओं को देखते हुए, सीआईसी ने अपने रजिस्ट्री को उच्चतम न्यायालय की सुनवाई के बाद मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
सूचना आयुक्त खुशवंत सिंह सेठी ने कहा कि शीर्ष न्यायालय के निर्देशों का इंतजार करना उचित होगा, क्योंकि उच्चत न्यायालय को मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करनी है।
केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, एक्सिस बैंक, आरबीएल बैंक, यस बैंक, सिटीबैंक एनए और अहमदनगर मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक की अपीलों पर अंतरिम आदेश जारी किए।
आयोग ने कहा कि इस मामले से जुड़े सवालों का राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव पड़ेगा और इनमें स्पष्टता के लिए शीर्ष अदालत का फैसला जरूरी है, खासकर आरबीआई की निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करने से जुड़े जयंतिलाल एन. मिस्त्री फैसले पर पुनर्विचार की याचिकाएं लंबित होने के कारण।
सीआईसी ने कहा,’आयोग ने राय व्यक्त की कि इस मामले में भारत के उच्चतम न्यायालय के निर्देश का लाभ लेना उचित होगा।’ इसने साथ ही अंतिम निर्णय आने तक कोई भी जानकारी प्रकट न करने का निर्देश दिया।
ये मामले भारतीय रिज़र्व बैंक के निरीक्षण और जोखिम मूल्यांकन रिपोर्ट, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) और जानबूझकर चूक करने वालों की सूची, कारण बताओ नोटिस, वैधानिक निरीक्षणों के बाद लगाए गए दंड और संबंधित प्रवर्तन कार्रवाइयों जैसी जानकारी का खुलासा करने के निर्णयों पर बैंकों द्वारा उठाई गई आपत्तियों से संबंधित हैं।
केंद्रीय बैंक ने उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आरटीआई अधिनियम के तहत, जिन हिस्सों को छूट प्राप्त है उन्हें अलग करने के बाद, ये रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने योग्य हैं।
हालांकि, बैंकों ने सीआईसी के समक्ष आरबीआई के दृष्टिकोण को चुनौती दी और तर्क दिया कि पर्यवेक्षी और नियामक जानकारी का खुलासा उनके व्यावसायिक हितों को नुकसान पहुंचाएगा और जयंतीलाल एन मिस्त्री के फैसले के प्रमुख पहलुओं पर उच्चतम न्यायालय द्वारा पुनर्विचार किया जा रहा है।
भाषा नोमान माधव
माधव


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