नागरिक समाज ने मुख्यमंत्री से एसआईआर प्रक्रिया को तीन महीने तक बढ़ाने का आग्रह किया

नागरिक समाज ने मुख्यमंत्री से एसआईआर प्रक्रिया को तीन महीने तक बढ़ाने का आग्रह किया

नागरिक समाज ने मुख्यमंत्री से एसआईआर प्रक्रिया को तीन महीने तक बढ़ाने का आग्रह किया
Modified Date: August 17, 2026 / 08:35 pm IST
Published Date: August 17, 2026 8:35 pm IST

बेंगलुरु, 17 अगस्त (भाषा) कर्नाटक में कई नागरिक संगठनों ने सोमवार को मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में हस्तक्षेप करने की मांग की। संगठनों ने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाते हुए गणना प्रक्रिया के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय देने की मांग की।

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में संगठनों ने दावा किया कि 1.09 करोड़ मतदाताओं के नाम ‘अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लीकेट, मृत और अन्य’ सूची में हैं।

उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के करीब आधे मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं और करीब 3,000 मतदान केंद्रों पर नाम हटाए जाने की दर 60 प्रतिशत से अधिक है।

संगठनों का दावा था कि कई बुजुर्गों को ‘‘मृत’’ दर्ज कर दिया गया है, काम के सिलसिले में दूसरे स्थानों पर गए लोगों को ‘‘अनुपस्थित’’ बताया गया है, जबकि जो लोग गणना फॉर्म ठीक से नहीं भर पाए, उन्हें ‘‘अन्य’’ श्रेणी में डालकर नाम हटाने के लिए चिह्नित किया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि 2002 के बाद अपना निवास स्थान बदलने वाले लोगों को गणना फॉर्म उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।

पत्र में संगठनों ने दावा किया कि पता बदलने के इच्छुक मतदाताओं के लिए निर्धारित फॉर्म-8 उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, जबकि मौजूदा मतदाताओं से फॉर्म-6 भरने को कहा जा रहा है, जो नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए होता है। संगठनों ने इसे निर्वाचन आयोग के नियमों का उल्लंघन बताया।

उन्होंने निर्वाचन आयोग पर पुनरीक्षण प्रक्रिया के लिए पर्याप्त तैयारी और जन-जागरूकता अभियान नहीं चलाने तथा बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं देने का आरोप लगाया।

पत्र में कहा गया कि बीएलओ के लिए घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करने, उन्हें समझाने, भरे हुए फॉर्म वापस लेने और संबंधित जानकारी अपलोड करने के लिए निर्धारित समय पर्याप्त नहीं है।

संगठनों ने कर्नाटक सरकार से गणना प्रक्रिया की अवधि तीन महीने बढ़ाने और पूरी प्रक्रिया को एक वर्ष में पूरा करने की मांग की।

उन्होंने सभी मतदान केंद्रों पर बीएलओ द्वारा दोबारा घर-घर जाकर सत्यापन करने, गणना फॉर्म वितरित करने और निवास स्थान बदलने वाले लोगों को फॉर्म-8 उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही ‘‘अनुपस्थित’’ और ‘‘अन्य’’ श्रेणी में दर्ज मतदाताओं की छोटी-मोटी गलतियों को सुधारने की भी मांग की।

संगठनों ने निर्वाचन आयोग या कर्नाटक सरकार की ओर से घर-घर जाकर संपर्क करने और सहायता केंद्र स्थापित करने समेत व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि यदि निर्वाचन आयोग इन मांगों पर सहमत नहीं होता है तो राज्य सरकार इस मुद्दे को विधानसभा में उठाए, प्रस्ताव पारित करे और आवश्यक कार्रवाई के लिए भारत निर्वाचन आयोग से आग्रह करे।

संगठनों ने जरूरत पड़ने पर कर्नाटक के हितों की रक्षा और पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर होने से बचाने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख करने का भी सुझाव दिया।

भाषा

राखी नरेश

नरेश


लेखक के बारे में