सीजेआई का सैन्य इकाइयों में पूर्व सैनिकों को अर्द्धन्यायिक स्वयंसेवक के रूप में शामिल करने का आह्वान

सीजेआई का सैन्य इकाइयों में पूर्व सैनिकों को अर्द्धन्यायिक स्वयंसेवक के रूप में शामिल करने का आह्वान

सीजेआई का सैन्य इकाइयों में पूर्व सैनिकों को अर्द्धन्यायिक स्वयंसेवक के रूप में शामिल करने का आह्वान
Modified Date: March 30, 2026 / 11:25 pm IST
Published Date: March 30, 2026 11:25 pm IST

लेह, 30 मार्च (भाषा) प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अर्द्धन्यायिक कार्यबल को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए सैन्य इकाइयों में प्रशिक्षित स्वयंसेवकों, खासकर पूर्व सैनिकों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि वे विधिक सहायता सेवाओं में योगदान दे सकें।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि न्याय प्रत्येक सैनिक तक पहुंचना चाहिए, और इस बात को दोहराया कि संविधान के अनुच्छेद 39ए के तहत न्याय तक पहुंच एक मौलिक अधिकार है।

एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि प्रधान न्यायाधीश ने रविवार को रैना सभागार में लेह स्थित ‘फायर एंड फ्यूरी कोर’ के अधिकारियों और जवानों के साथ बातचीत की, जिसमें उन्होंने न्यायपालिका और सशस्त्र बलों के बीच महत्वपूर्ण तालमेल को रेखांकित किया।

इस कार्यक्रम में लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण पल्ली, ‘फायर एंड फ्यूरी कोर’ के ‘जनरल ऑफिसर कमांडिंग’ लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला, लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा और पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह उपस्थित थे।

प्रधान न्यायाधीश ने प्रशिक्षित अर्द्धन्यायिक कार्यबल के महत्व पर जोर दिया और सैन्य इकाइयों में अर्द्धन्यायिक स्वयंसेवकों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने कहा, ‘‘योगदान देने के इच्छुक पूर्व सैनिकों का अर्द्धन्यायिक स्वयंसेवकों के रूप में स्वागत है।’’ उन्होंने न्याय तक पहुंच बढ़ाने के लिए कई भाषाओं में अनुवाद के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल सहित प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने में भारत की प्रगति का भी उल्लेख किया।

भाषा आशीष अमित

अमित


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