प्रधान न्यायाधीश ने सॉलिसिटर जनरल को उनकी नयी किताब के लिए बधाई दी

प्रधान न्यायाधीश ने सॉलिसिटर जनरल को उनकी नयी किताब के लिए बधाई दी

प्रधान न्यायाधीश ने सॉलिसिटर जनरल को उनकी नयी किताब के लिए बधाई दी
Modified Date: May 10, 2026 / 11:05 pm IST
Published Date: May 10, 2026 11:05 pm IST

नयी दिल्ली, 10 मई (भाषा) प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने रविवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दो पुस्तकों के विमोचन के अवसर उनकी लेखनी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने प्रतिष्ठित विधि जगत में ‘‘तीक्ष्ण बुद्धि और पैनी दृष्टि’’ के साथ प्रवेश किया है।

दिल्ली में मेहता की दो पुस्तकों – ‘द बेंच, द बार, एंड द बिजारे’ और ‘द लॉफुल एंड द ऑफुल’ के विमोचन के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में प्रधान न्यायाधीश कांत ने कहा कि जब मेहता ने उन्हें इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया तो वह सोच रहे थे कि अगर कानून की दुनिया किसी ‘कॉमेडी क्लब’ में छुट्टी मनाने चली जाए तो क्या होगा।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि पन्ने पलटते हुए उनके मन में बार-बार एक ही सवाल उठ रहा था कि मेहता को आखिर इन शानदार किताबों को लिखने का समय कहां से मिला?

उन्होंने कहा, ‘‘भारत के सॉलिसिटर जनरल के रूप में मैं उन्हें अपनी सुबह कोर्ट नंबर 1 में बिताते हुए देखता हूं, उनकी दोपहर संभवतः अन्य अदालतों और सरकारी कामों में बंटी होती है और मुझे उम्मीद है कि उनकी शाम उन हजारों पन्नों के कानूनी दस्तावेज पढ़ने में बीतती होगी और फिर भी, हम सब यहां एक नहीं, बल्कि दो किताबों के विमोचन के लिए आए हैं!’’

कार्यक्रम में शाह के परिवार, शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, वरिष्ठ वकीलों और कानूनी बिरादरी के अन्य सदस्यों की मौजूदगी में प्रधान न्यायाधीश ने वहां उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘तो मैंने इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश की! मेरे पास दो सिद्धांत हैं। या तो तुषार भाई ने ईश्वर से दिन में 25वां घंटा पाने के लिए अर्जी दी है और उसे सिर्फ अपने लिए सुरक्षित रखा है, या फिर उन्होंने यह खोज लिया है कि हास्य लिखने का सबसे अच्छा समय तब होता है जब कोर्ट नंबर 1 में सुनवाई के दौरान कोई फाइल पढ़ने में बहुत लंबा समय लग रहा हो। मेरा मानना ​​है कि दूसरा सिद्धांत ही सही है!’’

उन्होंने कहा, ‘‘ये केवल मजेदार कहानियां नहीं हैं, बल्कि इस बात का खुलासा भी करती हैं कि न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी मानवीय संवेदनाएं कभी-कभी उसके संगमरमर जैसे औपचारिक आवरण के पीछे से कैसे झलक उठती हैं। तुषार भाई केवल हमें लतीफे सुनाकर संतुष्ट नहीं होते, बल्कि वे हर किस्से को कुशलता से इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि वह मनोरंजन भी करे और ज्ञान भी दे।’’

प्रधान न्यायाधीश कांत ने कहा कि मेहता विनम्रतापूर्वक याद दिलाते हैं कि कानून अपनी गंभीरता के बावजूद अब भी एक गहन मानवीय उद्यम है।

भाषा सुरभि संतोष

संतोष


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