तटीय राज्यों ने चुनौतियों को अवसरों में बदला: ओम बिरला

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तटीय राज्यों ने चुनौतियों को अवसरों में बदला: ओम बिरला

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  • Publish Date - April 9, 2026 / 03:37 PM IST,
    Updated On - April 9, 2026 / 03:37 PM IST

पणजी, नौ अप्रैल (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बृहस्पतिवार को कहा कि तटीय राज्यों ने अपनी चुनौतियों को अवसरों में बदला है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान इसे प्रदर्शित किया था।

बिरला ने यहां ‘कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन’ (सीपीए) भारत क्षेत्र के जोन-सात सम्मेलन में कहा कि विकसित भारत के निर्माण में विधायी संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और युवा विधायकों की विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में बड़ी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा, ‘‘गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा तटीय राज्य हैं और इसके साथ चुनौतियां भी आती हैं। फिर भी, यहां के नेतृत्व ने अक्सर इन चुनौतियों को अवसरों में बदला है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सूखे, लंबी तटीय भूमि और आदिवासी क्षेत्रों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने (मोदी) औद्योगिकीकरण, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा दिया और कठिनाइयों को विकास में परिवर्तित किया। नर्मदा से शुष्क क्षेत्रों में जल पहुंचाया गया और वैश्विक परिवर्तनों का सामना करने के लिए नयी प्रौद्योगिकियों को अपनाया गया।’’

बिरला ने कहा कि इसी तरह अन्य तटीय राज्यों ने प्राकृतिक चुनौतियों को अवसरों में बदला है। उन्होंने कहा, ‘‘उनकी विधानसभाओं ने संकटों और आपदाओं से निपटने के लिए कानून बनाये और नीतियां पारित की हैं, जिससे विपरीत परिस्थितियों के बावजूद विकास हुआ है।’’

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान, मोदी गुजरात में बदलाव लाए, उन्होंने उद्योगों को स्थापित किया, ग्रामीण क्षेत्रों का विकास किया, पर्यटन स्थलों का कायाकल्प किया और जलभराव वाले क्षेत्रों को पानी उपलब्ध कराया।

उन्होंने कहा कि लोगों को अपने चुने हुए विधायकों से बहुत उम्मीदें और आकांक्षाएं होती हैं और तटीय क्षेत्रों के विकास के लिए गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा जैसे तीनों तटीय राज्यों को एक-दूसरे की सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के बीच सर्वश्रेष्ठ विधानसभा बनने के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए।’’

बिरला ने कहा कि दुनिया संसदीय लोकतंत्र को शासन की सर्वश्रेष्ठ प्रणाली के रूप में मान्यता देती है। उन्होंने कहा, ‘‘1952 से देश में हर चुनाव में मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी भारत के सफल लोकतंत्र का संकेत है।’’

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रौद्योगिकी का युग है, लेकिन इनके साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

बिरला ने कहा कि विधायक विधानमंडल के नियमों और प्रक्रियाओं को जितना अधिक समझेंगे, उनकी भागीदारी उतनी ही अधिक होगी और संवाद उतना ही अधिक रचनात्मक होगा।

इस मौके पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, गोवा और महाराष्ट्र विधानसभाओं के अध्यक्ष क्रमशः गणेश गांवकर और राहुल नार्वेकर ने भी संबोधित किया।

भाषा

देवेंद्र वैभव

वैभव