सीईसी ज्ञानेश कुमार की आलोचना के बीच कॉजपा उठाएगी निर्वाचन आयोग में सुधार का मुद्दा
सीईसी ज्ञानेश कुमार की आलोचना के बीच कॉजपा उठाएगी निर्वाचन आयोग में सुधार का मुद्दा
नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) विद्यालयों के बुनियादी ढांचे और आदिवासी शिक्षा जैसे मुद्दों पर अभियान संचालित करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने बुधवार को कहा कि अगर लोगों के मतदान के अधिकार से समझौता किया जाता है तो विभिन्न प्रयासों से कोई बदलाव नहीं आएगा और देश की अन्य समस्याओं के समाधान के लिए चुनावों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है।
कॉजपा संस्थापक अभिजीत दीपके ने संकेत दिया कि संगठन निर्वाचन आयोग में सुधार का मुद्दा उठाएगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग में मतभेद सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया। दो चुनाव आयुक्तों ने एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर बार-बार अपनी असहमति जताई है।
दीपके ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “निर्वाचन आयोग को ठीक करो! कल दिल्ली में महत्वपूर्ण संवाददाता सम्मेलन है। ज्ञानेश, अब बहुत हो चुका।”
कॉजपा ने बृहस्पतिवार के लिए निर्धारित अपने कार्यक्रम रद्द कर दिए और कहा कि उसका नेतृत्व दोपहर में दिल्ली में “भारत के लोकतंत्र को नियंत्रित करने” के विषय पर संवाददाता सम्मेलन करेगा।
कॉजपा के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने निर्वाचन आयोग पर “वोट चुराने” का आरोप लगाते हुए कहा, “कुछ भी काम नहीं करेगा क्योंकि भारत का निर्वाचन आयोग समझौता कर चुका है।”
दास ने कहा कि कॉजपा स्कूलों, बेरोजगारी, बुनियादी ढांचे और परीक्षा में अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर अपने अभियान जारी रख सकती है, लेकिन अगर लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर व्यवस्था में बदलाव नहीं ला सकते तो इन प्रयासों का कोई खास उद्देश्य नहीं रह जाएगा।
दास ने एक वीडियो बयान में कहा, “हम जितना चाहें, स्कूल ठीक करने का अभियान चला सकते हैं, जितना चाहें आदिवासी स्कूलों को ठीक करने का अभियान चला सकते हैं… लेकिन अगर व्यवस्था बदलने के लिए हमारे पास अंतिम साधन यानी वोट देने का अधिकार ही हमसे छीन लिया जाता है तो ऐसे प्रयासों से कोई मदद नहीं मिलेगी।”
दास ने कहा, “बदलाव लाने का मूल साधन चुनाव हैं।” उन्होंने कहा कि अगर युवा पीढ़ी और अन्य लोगों से चुनाव का अधिकार “छीन लिया जाता है” तो फिर बदलाव कैसे आएगा।
उन्होंने कहा कि इसी वजह से संगठन निर्वाचन आयोग के कामकाज और मताधिकार की सुरक्षा पर अधिक ध्यान देने की मांग कर रहा है।
भाषा अमित अविनाश
अविनाश
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