मौजूदा डिजिटल दौर में हो रहे बदलावों के अनुरूप प्रतिस्पर्धा कानूनों का अद्यतन होना आवश्यक : समिति

मौजूदा डिजिटल दौर में हो रहे बदलावों के अनुरूप प्रतिस्पर्धा कानूनों का अद्यतन होना आवश्यक : समिति

मौजूदा डिजिटल दौर में हो रहे बदलावों के अनुरूप प्रतिस्पर्धा कानूनों का अद्यतन होना आवश्यक : समिति
Modified Date: July 21, 2026 / 05:17 pm IST
Published Date: July 21, 2026 5:17 pm IST

नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) राज्यसभा की एक समिति ने मंगलवार को कहा कि मौजूदा डिजिटल युग में हो रहे तीव्र परिवर्तनों के अनुरूप प्रतिस्पर्धा कानूनों का निरंतर अद्यतन होना आवश्यक है ताकि उभरती हुई समस्याओं एवं विशिष्ट चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सके।

मिलिंद मुरली देवरा की अध्यक्षता वाली राज्यसभा की अधीनस्थ विधान संबंधी समिति ने उच्च सदन में पेश एक रिपोर्ट में यह सिफारिश की है।

समिति ने यह भी सिफारिश की कि मंत्रालय और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) को पूरे प्रतिस्पर्धा कानून ढांचे की नियामकीय संरचना की समय-समय पर व्यापक समीक्षा करनी चाहिए।

अपनी रिपोर्ट में समिति ने कहा कि इन समीक्षाओं में सभी संबंधित हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श किया जाए तथा वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप घरेलू ढांचे को व्यवस्थित रूप से बेंचमार्क किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भारतीय बाजार प्रतिस्पर्धी, निष्पक्ष तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप बना रहे।

समिति ने कहा कि समय के साथ प्रतिस्पर्धा कानून के प्रति लोगों की जागरूकता में वृद्धि हुई है और उसका मानना है कि इस दिशा में अभी और अधिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उसने कहा कि बाजार के विभिन्न प्रतिभागियों के बीच प्रतिस्पर्धा कानून के संबंध में प्रभावी जागरूकता से कानून का प्रवर्तन अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी होगा।

साथ ही समिति ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, स्टार्ट-अप तथा उभरते हुए व्यवसायों को प्रतिस्पर्धा कानून के सिद्धांतों एवं नियामकीय प्रक्रियाओं के संबंध में अपेक्षाकृत अधिक जागरूकता की आवश्यकता है, ताकि वे प्रतिस्पर्धी बाजारों में प्रभावी भागीदारी कर सकें।

समिति ने कहा कि उसकी राय है कि एकाधिकार की प्रवृत्तियों का सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव कम लाभान्वित क्षेत्रों, विशेषकर लघु व्यवसायों, एमएसएमई तथा स्टार्ट-अप पर पड़ता है। समिति ने सिफ़ारिश की कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग उन्हें पर्याप्त संरक्षण प्रदान करे तथा सुनिश्चित करे कि प्रतिस्पर्धा संबंधी कानूनों का अधिक प्रभावशीलता के साथ प्रवर्तन किया जाए, जिससे पहले से ही अपेक्षाकृत कमजोर हितधारकों की स्थिति और अधिक प्रतिकूल न हो।

रिपोर्ट में समिति ने कहा कि बाजार में मुक्त प्रतिस्पर्धा तथा नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिस्पर्धा-विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू करना अनिवार्य है।

समिति ने कारपोरेट संस्थाओं द्वारा प्रतिस्पर्धा संबंधी कानूनों एवं विनियमों के बार-बार उल्लंघनों पर चिंता व्यक्त की और कहा कि कहा कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को मौद्रिक दण्ड निर्धारण दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करना चाहिए, जिनमें बार-बार किए गए उल्लंघनों को गंभीर कारक माना गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दण्ड निर्धारण दिशानिर्देश, 2024 में प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 की विभिन्न धाराओं के उल्लंघन के मामलों में दण्ड राशि के निर्धारण की कार्यप्रणाली निर्धारित की गई है। पारदर्शिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समिति ने सिफ़ारिश की कि इन दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू किया जाए। साथ ही, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को अपने आदेशों में विस्तृत कार्यप्रणाली प्रदान करनी चाहिए कि दण्ड राशि की गणना कैसे की जाए।

भाषा

अविनाश मनीषा

मनीषा


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