आईआईटी रुड़की ने छात्रों-कर्मचारियों को सोशल मीडिया के जरिये राजनीतिक आंदोलनों को समर्थन को लेकर आगाह किया
आईआईटी रुड़की ने छात्रों-कर्मचारियों को सोशल मीडिया के जरिये राजनीतिक आंदोलनों को समर्थन को लेकर आगाह किया
नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-रुड़की ने अपने विद्यार्थियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि वे ‘‘मौजूदा राजनीतिक आंदोलन’’ जैसे किसी भी आंदोलन के प्रति सोशल मीडिया पर अपना समर्थन न दिखाएं।
सोमवार को जारी परामर्श में संस्थान के उन नियमों का जिक्र किया गया है जो विद्यार्थियों को ऐसा कोई भी बयान देने से रोकते हैं जिससे ‘‘संस्थान और सरकार के बीच संबंध खराब हो सकते हैं।’’
इस नये परामर्श ने सोशल मीडिया पर विवाद उत्पन्न कर दिया और कई उपयोगकर्ताओं ने इसे ‘‘मुंह बंद करने वाला आदेश’’ करार दिया। हालांकि संस्थान ने स्पष्ट किया है कि यह मौजूदा नियमों के अनुसार है और इसे संदर्भ से हटकर नहीं देखा जाना चाहिए।
आईआईटी रजिस्ट्रार ने 20 जुलाई को जारी परामर्श में कहा, ‘‘इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह देखा गया है कि परिसर में रहने वाले कुछ लोगों ने राजनीतिक आंदोलन से अपना जुड़ाव प्रदर्शित किया है, जिनकी अभी चर्चा और आलोचना हो रही है। सभी छात्रों, कर्मचारियों और हितधारकों को विनम्रतापूर्वक याद दिलाया जाता है कि आईआईटी में छात्रों को दाखिला और कर्मचारियों की नियुक्ति इसलिए की जाती है, ताकि वे अभियंत्रण, प्रौद्योगिकी, विज्ञान और कला के क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान, ज्ञान को आगे बढ़ाने और उसके प्रसार का काम कर सकें।
परामर्श में यह भी कहा गया है, ‘‘अधिसूचित आचरण नियमों में यह स्पष्ट रूप से दर्ज है कि कोई भी छात्र या कर्मचारी संस्थान की अनुमति के बिना राजनीतिक चर्चाओं में शामिल नहीं हो सकेगा और न ही किसी राजनीतिक गतिविधि में भाग ले सकेगा। इसके अलावा कोई भी छात्र या कर्मचारी मीडिया में सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई बयान या राय व्यक्त नहीं कर सकेगा, जिससे संस्थान और केंद्र सरकार या किसी अन्य संगठन के बीच संबंधों में असहज स्थिति पैदा हो सकती हो।”
सोमवार का दिन अभूतपूर्व उतार-चढ़ाव भरा रहा, जब संसद के मानसून सत्र के पहले दिन हजारों की संख्या में आक्रोशित युवा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद के पास एकत्र हुए, जिन्हें लाठियों और आंसू गैस के गोलों के दम पर पीछे खदेड़ दिया गया।
‘‘चलो संसद’’- यही वह नारा था, जिसने युवाओं को एकजुट किया और मध्य दिल्ली की कड़ी सुरक्षा वाली सड़कों को विरोध-प्रदर्शन के असाधारण दृश्यों में बदल दिया।
सोशल मीडिया पर मचे हंगामे के बाद, आईआईटी, रुड़की ने स्पष्ट किया कि यह सूचना एक आंतरिक सलाह थी, जो शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में विद्यार्थियों, संकायों और कर्मचारियों के बीच जारी की गई थी।
संस्थान के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘संस्थान के मौजूदा अधिसूचित आचरण नियमों के अनुसार हर साल ऐसी सलाहें नियमित रूप से जारी की जाती हैं और ये कोई नया निर्देश या नीति नहीं हैं। इस सूचना का गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए और न ही इसे संदर्भ से हटकर देखा जाना चाहिए।’’
भाषा सुरेश पवनेश
पवनेश

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