अनिवार्य सेवानिवृत्ति का उद्देश्य ‘बेकार कर्मचारियों’ को हटाना है: न्यायालय

अनिवार्य सेवानिवृत्ति का उद्देश्य ‘बेकार कर्मचारियों’ को हटाना है: न्यायालय

अनिवार्य सेवानिवृत्ति का उद्देश्य ‘बेकार कर्मचारियों’ को हटाना है: न्यायालय
Modified Date: August 6, 2026 / 09:37 pm IST
Published Date: August 6, 2026 9:37 pm IST

नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का उद्देश्य “बेकार कर्मचारियों” को हटाना है। न्यायालय ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के एक निरीक्षक की सेवा में बनाए रखने की याचिका खारिज करते हुए कहा कि वर्दीधारी बलों के सदस्यों से उच्च दक्षता, सतर्कता और अनुशासन बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने गौर किया कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति से ठीक पहले के दो वर्षों में अपीलकर्ता के प्रदर्शन में साफ गिरावट आई थी; उसकी ग्रेडिंग “अच्छी” से गिरकर “औसत” हो गई थी और उसके बाद वैसी ही बनी रही।

पीठ ने कहा, “इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि अपीलकर्ता सीआईएसएफ में काम कर रहा था, जो एक अनुशासित और वर्दीधारी बल है और जिसे सुरक्षा के महत्वपूर्ण काम सौंपे गए हैं। इस तरह के बल के सदस्यों से हमेशा कुशलता, सतर्कता और अनुशासन का उच्च स्तर बनाए रखने की उम्मीद की जाती है। इस नजरिए से देखें तो सक्षम अधिकारी के फैसले में किसी भी तरह के दखल की जरूरत नहीं है।”

न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश को सही ठहराते हुए यह टिप्पणी की। उच्च न्यायालय ने सीआईएसएफ अधिकारी की याचिका खारिज कर दी थी और सक्षम अधिकारी द्वारा 2010 में उसके खिलाफ अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को बरकरार रखा था।

न्यायालय ने कहा कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का मकसद “निकम्मे” कर्मचारियों को हटाना है, ताकि सरकारी सेवा में काम करने की क्षमता और ईमानदारी का ऊंचा स्तर बनाए रखा जा सके।

इसने कहा, “यह स्थापित कानून है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश दंडात्मक प्रकृति का नहीं होता है और इसमें न तो कोई कलंक, पूर्वाग्रह या दुर्व्यवहार का कोई संकेत होता है। अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश जनहित में होता है और सरकार के अपने संतोष के आधार पर जारी किया जाता है।”

इस मामले में, अपीलकर्ता 28 जून, 1982 को सहायक उपनिरीक्षक के तौर पर सीआईएसएफ में शामिल हुआ। नौकरी के दौरान उसे दो बार पदोन्नति मिली।

अपीलकर्ता की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, समीक्षा की अवधि के आखिरी दो साल में उसके काम करने की क्षमता में कमी आई।

भाषा प्रशांत नेत्रपाल

नेत्रपाल


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