तेजाब हमले के पीड़ितों की मदद के संबंध में ठोस नीतिगत रूपरेखा पेश की जाए: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
तेजाब हमले के पीड़ितों की मदद के संबंध में ठोस नीतिगत रूपरेखा पेश की जाए: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
प्रयागराज, 19 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) और प्रमुख सचिव (महिला एवं बाल कल्याण विभाग) से 15 मई को अदालत के समक्ष पेश होकर तेजाब हमले के पीड़ितों के मुआवजे, पुनर्वास और दीर्घकालीन मदद के लिए एक ठोस नीतिगत रूपरेखा प्रस्तुत करने को कहा है।
न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार एक महिला के जीवन को बदल देने वाले तेजाब हमले के नौ साल बाद भी एक समग्र सहायता प्रणाली स्थापित करने में विफल रही है।
अदालत ने पीड़िता के इलाज, सर्जरी, काउंसलिंग, शिक्षा और रोजगार संबंधी सहायता के लिए प्रस्तावित व्यवस्था बताने को कहा। यह आदेश तेजाब के हमले की पीड़िता की याचिका की सुनवाई करते हुए पारित किया गया।
अदालत ने 14 मई के अपने आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार की एकमुश्त वित्तीय सहायता की यह कहते हुए आलोचना की कि एक पीड़ित को उबारने के लिए उसे मामूली भुगतान के बजाय जीवनभर सुव्यवस्थित सहायता की जरूरत होती है।
अदालत ने सरकार से यह अवगत कराने को कहा कि चोट की प्रकृति और जीवनभर की परेशानी को देखते हुए मुआवजे की राशि किस प्रकार तर्कसंगत बनाई सकती है।
अदालत ने कहा, “इस अदालत द्वारा बार बार अवसर दिए जाने और पिछले आदेश में कई प्रश्न पूछे जाने के बावजूद कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है कि अभी तक राज्य सरकार ने कोई समग्र नीति क्यों नहीं बनाई।”
भाषा सं राजेंद्र जोहेब
जोहेब

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