कांग्रेस ने नरेन्द्र मोदी सरकार को मजदूर विरोधी करार दिया, नयी श्रम संहिता की समीक्षा की मांग की

कांग्रेस ने नरेन्द्र मोदी सरकार को मजदूर विरोधी करार दिया, नयी श्रम संहिता की समीक्षा की मांग की

कांग्रेस ने नरेन्द्र मोदी सरकार को मजदूर विरोधी करार दिया, नयी श्रम संहिता की समीक्षा की मांग की
Modified Date: May 1, 2026 / 05:46 pm IST
Published Date: May 1, 2026 5:46 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) कांग्रेस ने शुक्रवार को नरेन्द्र मोदी सरकार पर ‘मजदूर विरोधी’ होने का आरोप लगाते हुए मांग की कि नयी श्रम संहिता की समीक्षा की जाए, मनरेगा को बहाल किया जाए और तथा 400 रुपये प्रतिदिन राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की जाए।

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत में आज की बेरोजगारी ‘हम दो, हमारे दो’ नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है।

खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘मोदी सरकार ने ‘हम दो हमारे दो’ नीति की वजह से कामगार-विरोधी श्रम संहिता को लागू किया। इसकी वजह से नोएडा हो या पानीपत का आईओसीएल संयंत्र या रायखेड़ा में अदाणी की फैक्टरी या पतरातू का एनटीपीसी या फिर श्रीपेरुंबुदूर में सैमसंग की फैक्टरी – हर जगह अशांति बनी हुई है।’’

उन्होंने कहा कि यह संहिता नौकरी की सुरक्षा के बजाय अनुबंधित श्रम तथा ‘जब चाहा भर्ती कर ली, जब चाहा नौकरी से निकाल दिया’ जैसी नीतियों को बढ़ावा देती हैं, इसलिए नयी श्रम संहिता की समीक्षा की जाए।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मोदी सरकार ने जबरदस्ती संसद में कानून पारित कर मनरेगा को समाप्त कर दिया है।

उन्होंने दावा किया, ‘‘ (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी जी ने मजदूरी के खर्च का 40 प्रतिशत बोझ राज्य सरकारों पर डाल दिया है। राज्य सरकारें यह खर्च नहीं उठा सकती हैं और अंततः वे काम देना बंद कर देंगी।’’

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने कामगारों को बेरोजगारी और ‘गिग वर्क’ की ओर धकेल दिया है तथा फिलहाल 69 प्रतिशत लोग न्यूनतम मजदूरी से कम पर काम कर रहे हैं ।

खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने मजदूरी में ठहराव लाकर लोगों के सामने संकट खड़ा कर दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘महंगाई को अगर ध्यान में रखें तो पिछले एक दशक में (2014-15 से 2022-23) भारत के अधिकतर श्रमिकों की मजदूरी में सालाना एक प्रतिशत से कम की वृद्धि हुई है।’’

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मोदी सरकार ने पढ़े-लिखे लोगों के बीच बड़े पैमाने पर बेरोजगारी का संकट पैदा कर दिया है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बेचकर नौकरियां खत्म कर दी गईं ।

खरगे ने कहा, ‘‘सरकार ने लगभग 30 लाख सरकारी रिक्त पदों को भरने से इनकार किया है। सरकार की गलतियों की वजह से सूक्ष्म, लघु एवं मझौले उपक्रम खत्म हो गए हैं।’’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी भारत के कामगारों के लिए पांच मांगें दोहराती है। उन्होंने कहा कि मनरेगा को फिर से शुरू किया जाए और शहरी इलाकों में इसका विस्तार हो।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन की जाए एवं उसमें मनरेगा को भी शामिल किया जाए।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि स्वास्थ्य का अधिकार कानून बनाया जाए तथा मजदूरों एवं कामगारों को 25 लाख रुपये तक की सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जाये।

उन्होंने कहा कि सभी असंगठित श्रमिकों के लिए ‘जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा’ हो।

उन्होंने कहा कि सरकार के मुख्य कार्यों में रोजगार के ठेकेदारीकरण को रोकना और नयी श्रम संहिता की समीक्षा शामिल हो।

भाषा राजकुमार मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में