नयी दिल्ली, 10 जनवरी (भाषा) कांग्रेस ने शनिवार को संप्रग शासनकाल के ग्रामीण रोजगार कानून को ‘‘निरस्त’’ करने के विरोध में अपना 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ शुरू किया और हर जिले में प्रेसवार्ता आयोजित की।
विपक्षी दलों का आंदोलन 25 फरवरी तक जारी रहेगा, जिसमें ‘वीबी-जी राम जी’ अधिनियम को वापस लेने और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में अधिकार-आधारित कानून के रूप में बहाल करने तथा काम के अधिकार, और पंचायतों के अधिकार को बहाल करने की मांग की जा रही है।
शनिवार को सभी जिला मुख्यालयों में प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें संसद के शीतकालीन सत्र में मनरेगा को ‘‘निरस्त’’ किए जाने और उसके स्थान पर वीबी-जी राम जी अधिनियम लागू किए जाने पर चर्चा की गई।
इसके बाद 11 जनवरी को जिला मुख्यालयों में एक दिन का उपवास और प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘कांग्रेस इस संघर्ष को तब तक जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है, जब तक कि हम काम, आजीविका और जवाबदेही के उस अधिकार की बहाली हासिल नहीं कर लेते, जिसे (नरेन्द्र) मोदी सरकार ने मनरेगा को ध्वस्त करके छीन लिया है।’’
आंदोलन के कार्यक्रम के अनुसार, इस क्रम में 12 से 29 जनवरी तक सभी ग्राम पंचायतों में चौपाल और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसके बाद काम के अधिकार की मांग को लेकर 30 जनवरी को वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा।
सात से 15 फरवरी तक विधानसभाओं का घेराव किया जाएगा, जबकि राष्ट्रव्यापी आंदोलन के समापन से पहले 16 से 25 फरवरी के बीच चार बड़ी रैलियां आयोजित की जाएंगी।
कांग्रेस ने कहा है कि वह ‘वीबी-जी राम जी’ कानून को पूरी तरह से वापस लिए जाने और मनरेगा को बहाल करने की मांग करती है।
विपक्षी दल ने कहा है कि जहां निरस्त किए गए काले कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन दिल्ली केंद्रित था, वहीं मनरेगा बचाओ संग्राम पंचायत, ब्लॉक, जिला और राज्य केंद्रित होगा।
भाषा
नेत्रपाल दिलीप
दिलीप