कांग्रेस नेता सुरजेवाला ने यूएनआई परिसर में पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की
कांग्रेस नेता सुरजेवाला ने यूएनआई परिसर में पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की
नयी दिल्ली, 21 मार्च (भाषा) कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) के रफी मार्ग स्थित परिसर पर पुलिस कार्रवाई के लिए शनिवार को भाजपा नीत केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की और कहा कि मीडिया के साथ इस तरह का व्यवहार अब एक चलन बनता जा रहा है।
सुरजेवाला ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘जिस तरह से यूएनआई के परिसर में पुलिस, अर्द्धसैन्य बलों द्वारा मीडिया के साथ व्यवहार किया गया, उससे एक बात साफ है कि मीडिया बंधुओं के लिए भाजपा सरकार का हिटलर शाही फरमान- तोड़ दिए जाओगे, निचोड़ दिए जाओगे, ज़्यादा अगर बोले, ज़्यादा अगर लिखे, ज़्यादा अगर रिपोर्टिंग की और सरकार के खिलाफ एक शब्द भी बोले तो…मरोड़ दिए जाओगे।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘हुक्म है हुक्मरान का, फरमान है उस अहंकारी जुबान का…ये केवल एक बार नहीं हुआ, ये एक पैटर्न है, तरीका है, झुको, नतमस्तक हो या फिर सत्ता का डंडा चलेगा।’’
कांग्रेस नेता ने कहा कि 2016 में केंद्र में सरकार ने एनडीटीवी समूह के हिंदी न्यूज चैनल एनडीटीवी इंडिया पर एक दिन का प्रतिबंध लगाया, क्योंकि रिपोर्टिंग सरकार को उजागर कर रही थी। उन्होंने कहा कि 2017 में एनडीटीवी और उसके संस्थापकों को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) तथा अन्य जांच एजेंसियों द्वारा प्रताड़ित किया गया और अंततः यह चैनल उद्योगपति गौतम अदाणी ने खरीदा।
सुरजेवाला ने कहा कि 2023 में बीबीसी ने एक डॉक्यूमेंट्री बनाई, उसके बाद इनकम टैक्स का छापा पड़ गया। उन्होंने कहा कि ‘‘कुछ ऐसा ही राघव बहल के मीडिया संस्थान ‘‘क्विंट’’ का हुआ।
कांग्रेस नेता ने कहा कि राघव बहल के नेतृत्व में ‘‘क्विंट’’ निष्पक्ष पत्रकारिता का प्रतीक था लेकिन अदाणी समूह की कंपनी एएमजी मीडिया नेटवर्क्स ने उसकी बड़ी हिस्सेदारी को ख़रीद ली।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार ने अपनी आलोचना को दबाने के लिए हाल में ‘4 पीएम’ जैसे स्वतंत्र आवाजों को निशाना बनाया और अंततः इस यूट्यूब चैनल को बंद करवा दिया।
सुरजेवाला ने पत्रकारों पर हुए व्यक्तिगत हमलों के कई मामलों का हवाला दिया, जिनमें 2017 में गौरी लंकेश की गोली मारकर हत्या और 2020 में हाथरस बलात्कार मामले पर रिपोर्टिंग करते समय सिद्दीक कप्पन की गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तारी शामिल है।
उन्होंने कहा, ‘‘साल 2025 में विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत का रैंक दुनिया के 180 देशों में 151 था। उससे पहले साल 2024 में रैंक 159 था। पूरी दुनिया एक सुर में कह रही है कि भारत में निष्पक्ष मीडिया के लिए जगह नहीं है।’’
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद शुक्रवार को केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय (एल एंड डीओ) द्वारा यूएनआई परिसर को सील कर दिया गया। यूएनआई ने इस कार्रवाई को ‘‘अभूतपूर्व क्रूरता और मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला’’ करार दिया।
भाषा आशीष माधव
माधव

Facebook


