शह मात The Big Debate: काली पट्टी के साथ जश्न, मजहबी एजेंडे पर प्रश्न!… ईद के दिन दी गई खामेनेई को श्रद्धांजलि, मुस्लिमों के लिए देश बड़ा या मजहब?

MP Politics News: ईद - मुस्लिम समाज में ख़ुशी , उल्लास और जश्न का त्योहार है, लेकिन पहले जिस खुशी के साथ मुस्लिम समुदाय ये त्योहार मनाता था।

Modified Date: March 21, 2026 / 11:50 pm IST
Published Date: March 21, 2026 11:50 pm IST

MP Politics News: भोपाल: ईद – मुस्लिम समाज में ख़ुशी , उल्लास और जश्न का त्योहार है, लेकिन पहले जिस खुशी के साथ मुस्लिम समुदाय ये त्योहार मनाता था। अब की बार उसके रंग फीके दिखाई दे रहे हैं और इसका कारण लोकल नहीं ग्लोबल है। इजराइल के साथ हुए युद्ध में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के चलते। (MP Politics News) मध्यप्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मुस्लिम समुदाय ने पुराने कपड़े पहने, हाथ में काली पट्टी बांधे, खामेनेई को श्रद्धांजलि देते हुए ईद मनाई, लेकिन समाज के साथ ईद में ऐसे मातमी अंदाज़ को भाजपा का अल्पसंख्यक मोर्चा भी पचा नहीं पा रहा है। BJP अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता मुजम्मिल अली ने तल्ख लहजे में कहा कि- काली पट्टी बांधकर देश का माहौल ख़राब ना करें जिन्हें तकलीफ़ है वो वीज़ा लेकर ईरान चले जाएं।

बीजेपी नेता ने खामेनेई समर्थकों को जहां ईरान जाने की नसीहत दे डाली, तो कांग्रेस, मुसलमानों के काली पट्टी बांधकर ईद मनाने के समर्थन में उतर आई। (MP Politics News)  कांग्रेस ने कहा कि- शिया समुदाय का काली ईद मनाना और नारेबाजी करना भारत सरकार की विदेश नीति की विफलता का परिणाम है।

कुल मिलाकर ईद पर मातम के बीच सच ये है कि- दुनिया के कई मुस्लिम देशों में सरकार के निर्णयों के खिलाफ ऐसे विरोध करने और बोलने की आज़ादी भी नहीं है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि खामेनेई की मौत का लगातार मातम मनाने वाले लोग ये क्यूँ भूल रहे हैं कि- ऐसे खुल के अपनी बात कहने की आज़ादी भी उन्हें भारत से ही मिली है? (MP Politics News)  सवाल ये भी कि- जश्न के पर्व में मातम मनाने के पीछे का संदेश क्या है? क्या ये उकसावे जैसा नहीं है? सबसे बड़ा सवाल ये कि- भारत में हुए आतंकी हमलों के बाद भी क्या शिया मुस्लिम समुदाय ने देश के पक्ष में ऐसा विरोध जताया है?

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