नक्सलियों के साथ रहते-रहते कांग्रेस के नेता खुद नक्सलवादी बन गए : शाह

नक्सलियों के साथ रहते-रहते कांग्रेस के नेता खुद नक्सलवादी बन गए : शाह

नक्सलियों के साथ रहते-रहते कांग्रेस के नेता खुद नक्सलवादी बन गए : शाह
Modified Date: March 30, 2026 / 09:06 pm IST
Published Date: March 30, 2026 9:06 pm IST

नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में कांग्रेस और सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर करार प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि नक्सलियों के साथ रहते-रहते ‘‘एक पार्टी’’ के नेता खुद नक्सलवादी बन गए।

शाह ने देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त किए जाने के मुद्दे पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए राहुल गांधी पर नक्सलियों का समर्थन करने का आरोप लगाया।

गृह मंत्री ने कहा, ‘‘राहुल गांधी जी अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई बार नक्सलियों और उनके हमर्ददों के साथ देखे गए हैं। भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सल फ्रंटल संगठन ने हिस्सा लिया, जिसका रिकॉर्ड भी है।’’

उन्होंने दावा किया कि 2010 में ओडिशा में लाडो शिकोका के साथ राहुल ने मंच साझा किया और शिकोका ने उसी मंच से भड़काऊ भाषण दिया तथा उन्हें माला भी पहनाई।

उन्होंने यह भी दावा किया कि 2018 में हैदराबाद में, राहुल ने जी वी राव से मुलाकात की, जो (नक्सल) विचाराधारा के करीब थे तथा मई 2025 में शांति समन्वय समिति (सीसीपी) के सदस्यों से मुलाकात की।

विपक्षी सदस्यों के शोरगुल के बीच शाह ने कहा, ‘‘172 जवानों को मारने वाला (माड़वी) हिडमा जब मारा गया, तो इंडिया गेट पर नारे लगे कि कितने हिडमा मारेगो, हर घर से हिडमा निकलेगा।’’

उन्होंने कहा कि इससे संबंधित वीडियो को राहुल गांधी ने स्वयं ट्वीट किया था और ऐसे में वह कैसे बच सकते हैं।

शाह ने कांगेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने 1970 से लेकर मार्च 2026 तक नक्सलाद और नरसंहार का समर्थन किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘जो 20 हजार लोग मारे गए, उसका कोई दोषी है तो वह कांग्रेस की वामपंथी विचारधारा है…।’’

गृह मंत्री ने राहुल पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘नक्सलियों के साथ रहते-रहते एक पार्टी और उसके नेता खुद नक्सलवादी बन गए। इसका जवाब इस देश की जनता को उन्हें चुनाव में देना पड़ेगा। यह बात रूकेगी नहीं। जनता की अदालत में उन्हें जवाब देना पड़ेगा।’’

उन्होंने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि मनमोहन सिंह सरकार के दौरान राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) का गठन किया गया और इस तरह एक संविधानेत्तर मंच बनाया गया, जिसकी अध्यक्ष सोनिया गांधी थीं।

शाह ने यह दावा भी किया कि कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने महेश राउत नाम के एक नक्सली की रिहाई के लिए अपनी पार्टी शासित एक राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था।

उन्होंने सवाल किया, ‘‘जब केंद्र सरकार का एक संविधानेत्तर प्राधिकरण, जो प्रधानमंत्री से भी ऊपर था, के सदस्य यदि नक्सलवाद के समर्थक हों तो किस तरह से नक्सलियों का हौसला टूटेगा? और यह कांग्रेस पार्टी ने किया था।’’

उन्होंने यह दावा भी किया कि 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जब प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास फेलोशिप शुरू की, तो उसका एक लाभार्थी नक्सलवादी बना।

शाह ने कांग्रेस नेता पी चिदंबरम पर भी प्रहार करते हुए दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ के 76 जवानों के मारे जाने के बाद कांग्रेस नेता ने कहा था कि ‘‘हम आपसे हथियार डालने को नहीं कह सकते, हम जानते हैं कि आप ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि आप हथियारबंद आजादी की लड़ाई में विश्वास करते हैं।’’

भाषा सुभाष अविनाश

अविनाश


लेखक के बारे में