रास में कांग्रेस सदस्य ने चार्टर्ड अकाउंटेंट के लिए सुरक्षा व ‘बिग फोर’ फर्म पर नियंत्रण की मांग की
रास में कांग्रेस सदस्य ने चार्टर्ड अकाउंटेंट के लिए सुरक्षा व ‘बिग फोर’ फर्म पर नियंत्रण की मांग की
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) राज्यसभा में बृहस्पतिवार को कांग्रेस सदस्य विवेक के तन्खा ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) को कानूनी सुरक्षा देने और भारत में चार बहुराष्ट्रीय ऑडिट फर्मों के प्रभुत्व को तोड़ने के लिए कदम उठाने की मांग की।
शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए तन्खा ने कहा कि घरेलू सीए फर्मों को प्रतिस्पर्धा करने के लिए सरकारी समर्थन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि चार बहुराष्ट्रीय ऑडिट फर्मों डिलॉइट, पीडब्ल्यूसी, ईवाई और केपीएमजी में से प्रत्येक के पास 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के अनुबंध हैं, जबकि लगभग एक लाख भारतीय सीए फर्मों का व्यवसाय 10 करोड़ रुपये से अधिक नहीं हो पाता।
तन्खा ने कहा, “मैं उन लगभग पांच लाख चार्टर्ड अकाउंटेंट की चिंता व्यक्त कर रहा हूँ जो इस देश में काम करते हैं, और इनमें से चार लाख से अधिक विदेशों में हैं। ये हमारे व्यवसायों के संरक्षक हैं और सरकार की नीतियों के क्रियान्वयन में इनकी भूमिका संकट प्रबंधक की हैं।”
उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी जैसी नीतियों के कार्यान्वयन में चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
तन्खा ने कहा, “मंत्री घोषणा कर सकते हैं, लेकिन इसे लागू करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट ही हैं। सरकार नीति घोषित करती है, लेकिन चार्टर्ड अकाउंटेंट जनता के लिए इसे लागू करते हैं, क्योंकि इतने सारे फॉर्म, कानून और नियम होते हैं, जिनके बारे में आम आदमी जान भी नहीं सकता।”
उच्च सदन में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे तन्खा ने चार्टर्ड अकाउंटेंट की गोपनीयता और ग्राहक की सुरक्षा पर भी चिंता जताई, और उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट को ग्राहकों द्वारा दिए गए दस्तावेजों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने कहा, “अब समय आ गया है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरक्षा अधिनियम या कम से कम ऐसा कानून बने जो वकीलों और डॉक्टरों की तरह चार्टर्ड अकाउंटेंट की भी रक्षा करे।”
तन्खा ने यह भी सवाल उठाया कि भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट कंपनियां कैसे प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं, जब 500 करोड़ रुपये से अधिक के अनुबंध के लिए निविदाएं जारी होती हैं।
उन्होंने कहा कि यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि चार बड़ी फर्मों का बहुत प्रभाव है और ज्यादातर नौकरशाहों के बच्चे या तो इन फर्मों से जुड़ रहे हैं या अब वकील बन रहे हैं।
कांग्रेस सदस्य ने कहा कि अब घरेलू चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्मों को बढ़ावा देने और उन ‘‘बिग फोर’’ की प्रभुत्व क्षमता को कम करने का समय आ गया है, जो “भारत में सभी ऑडिट, लेखांकन और क्रियान्वयन प्रक्रियाओं में शामिल हैं।”
उन्होंने पश्चिम एशिया में काम कर रहे 8,000-10,000 चार्टर्ड अकाउंटेंट के योगदान का भी उल्लेख किया और कहा कि ये सीए भारत में व्यवसाय और धन ला रहे हैं।
भाषा मनीषा अविनाश
अविनाश

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