नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) कांग्रेस ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘‘नाराज फूफा’’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना अपनी ‘‘नाकामियों’’ को छिपाने के लिए हर साल विपक्ष को नया विशेषण देने की उनकी कार्यशैली का हिस्सा है।
विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के मंच का दुरुपयोग करने और शनिवार को आयोजित कॉलेज के शताब्दी समारोह को ‘‘एक और राजनीतिक प्रचार’’ में बदलने का आरोप लगाया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ‘‘नरेन्द्र मोदी जी कल दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में गए। यह देश के युवाओं, शिक्षा और उनके भविष्य पर संवाद का अवसर था। लेकिन अफसोस, युवाओं के सवालों का सामना करने के बजाय भाषण फिर एक राजनीतिक प्रचार में बदल गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मोदी जी की कार्यप्रणाली लोकतंत्र में सवालों को दबाने के लिए विपक्ष को साल दर साल एक नया विशेषण देना.. ताकि उनकी खुद की नाकामियां छिपी रहें। नाराज फूफा, दिमागी नक्सल, अर्बन नक्सल, खान मार्केट गैंग, आंदोलनजीवी, परजीवी।’’
उन्होंने कहा कि विशेषण बदलते रहते हैं, पर मोदी सरकार की ‘‘जनविरोधी नीतियां’’ नहीं बदलतीं।
उन्होंने कहा, ‘‘मोदी जी, संपर्क की जरूरत तभी पड़ती है, जब आप लोगों की पहुंच से बाहर हो जाते हैं। प्रधानमंत्री जी ने अपना “रिपोर्ट कार्ड” (प्रगति रिपोर्ट) दिखाया। देश का युवा भी अपना ‘रिपोर्ट कार्ड’ लेकर खड़ा है। इस ‘रिपोर्ट कार्ड’ में है – बेरोजगारी, वर्षों से अटकी सरकारी भर्तियां, पेपर लीक से परेशान विद्यार्थी, महंगी होती शिक्षा, घटते छात्रवृत्ति के अवसर और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर बढ़ता दबाव।’’
उन्होंने कहा कि ‘‘छात्रों की गूंज’’ को सुनिए, इधर-उधर की बातों से समाधान नहीं निकलेगा।
कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि श्रेष्ठता थोपने की कोशिश अक्सर हीन भावना की सबसे खराब अभिव्यक्ति होती है।
खेड़ा ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘प्रधानमंत्री के रूप में 12 साल बाद भी, एसआरसीसी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में देश के युवाओं को देने के लिए उनके पास कोई दृष्टिकोण, कोई प्रेरणादायक संदेश और कुछ भी सकारात्मक न होना, और इसके बजाय विपक्ष पर छींटाकशी करना, एक ऐसे प्रधानमंत्री पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिनके पास न तो कोई विचार बचा है और न कहने को कोई ठोस चीज है और ज़ाहिर तौर पर कहने के लिए कोई सार्थक बात भी नहीं बची है।’’
मोदी ने शनिवार को कहा था कि भारत ना केवल 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, बल्कि युद्धों और व्यवधानों के बावजूद रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है, जो देश की ताकत को दर्शाता है। उन्होंने कहा था कि भारत की अर्थव्यवस्था को ‘पांच नाजुक’ अर्थव्यवस्थाओं में पहुंचाने वाले लोग अब देश की 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि को पचा नहीं पा रहे हैं।
एसआरसीसी के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, ‘‘आज आतंकवाद फैलाने वालों को करारा जवाब दिया जा रहा है। अगर पाकिस्तान कोई नापाक हरकत करता है, तो भारतीय सेना उसके घर में घुसकर हमला करती है।’’
उन्होंने कहा था कि जम्मू कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक शांति है और नक्सलवाद को खत्म कर दिया गया है।
मोदी ने याद किया कि 2013 में, जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में आखिरी बार एसआरसीसी के छात्रों को संबोधित किया था, तब देश हर मोर्चे पर संघर्ष कर रहा था। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार, आतंकवाद और महंगाई पर कोई नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब भारत आर्थिक और सामाजिक रूप से कहीं अधिक सुरक्षित है।
उन्होंने कहा था कि हालांकि इसे देखने के बाद कुछ लोगों की निराशा बढ़ रही है। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे लोगों के लिए मैंने लालकिले से (स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान) होम्योपैथी की एक खुराक दी थी… ‘दिमागी नक्सल’।’’
मोदी ने कहा, ‘‘जब मैंने ‘दिमागी नक्सल’ कहा, तो ऐसे सभी लोग सामने आ गए और मेरी आलोचना करने लगे। जो लोग दिमागी नक्सलवाद को बढ़ावा दे रहे थे, उनका असली रंग जनता ने देखा।’’
मोदी ने कहा कि भारत की 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि ऐसे समय में भी हुई है जब पश्चिम एशिया में युद्ध जारी है और व्यापार से जुड़े व्यवधान बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी वृद्धि हासिल करना भारत की ताकत को दर्शाता है। वह अप्रैल-जून तिमाही की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर का जिक्र कर रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी जानते हैं कि भारत को ‘नाजुक पांच’ अर्थव्यवस्थाओं में पहुंचाने वाले लोग अब देश की 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि के आंकड़े को पचा नहीं पा रहे हैं।’’ यह कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर परोक्ष हमला था, जिन्होंने आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि परिसर के बाहर छात्रों को दो तरह के लोग मिलेंगे—‘‘वे जो समाज की शक्ति को सकारात्मक रूप से राष्ट्र की शक्ति में बदलते हैं और दूसरे वे, जो किसी भी काम के शुरू होते ही ‘नाराज फूफा’ बन जाते हैं।’’
भाषा अमित दिलीप
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