(शेन क्रोनिन, ऑकलैंड विश्वविद्यालय और जोस कार्लोस बोरैरो, दक्षिण कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय)
वाशिंगटन, छह सितंबर (द कन्वरसेशन) जनवरी 2022 में टोंगा साम्राज्य के हुंगा ज्वालामुखी में हुआ भीषण विस्फोट पूरी दुनिया के लिए अप्रत्याशित घटना थी।
इस विस्फोट से राख और गैस का गुबार वायुमंडल में 50 किलोमीटर से अधिक ऊंचाई तक पहुंच गया, दबाव तरंगें पूरी दुनिया में फैल गईं और कई सुनामी लहरें पैदा हुईं। इस घटना ने टोंगा के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई और कम से कम तीन लोगों की मौत हुई। लेकिन, इस ऐतिहासिक घटना के बाद मिली सबसे महत्वपूर्ण जानकारियों में से एक यह है कि इन सुनामी लहरों का कारण एक जैसा नहीं था।
विस्फोट के शुरुआती चरण में हुए विशाल धमाकों से पहली सुनामी पैदा हुई थी। हुंगा के नजदीक टोंगाटापू द्वीप पर कुछ ही मिनटों में एक से चार मीटर तक ऊंची लहरें पहुंच गई थीं।
इसके बाद एक घंटे से अधिक समय बाद कुछ और विनाशकारी घटना हुई। हुंगा से 100 किलोमीटर के दायरे में स्थित द्वीपों पर 18 से 40 मीटर तक ऊंची सुनामी लहरें पहुंचीं, जिन्होंने दक्षिणी और मध्य टोंगा के रिसॉर्ट और गांवों को तबाह कर दिया।
हाल ही में प्रकाशित हमारे शोध से पता चला है कि यह सबसे बड़ी सुनामी किसी अन्य विस्फोट के कारण नहीं, बल्कि ज्वालामुखी के ‘कैल्डेरा’ (मुख्य गड्ढे) के अचानक धंसने से पैदा हुई थी। इस धंसाव से समुद्र के भीतर ऐसी ध्वनि तरंगें उत्पन्न हुईं, जिन्हें हजारों किलोमीटर दूर तक महसूस किया जा सकता था।
यह खोज पृथ्वी पर आने वाली कुछ सबसे अप्रत्याशित सुनामियों के बारे में समुदायों को चेतावनी देने के एक नए तरीके की ओर संकेत कर सकती है।
समुद्र के भीतर ज्वालामुखी की गतिविधियों को सुनना : समुद्र के नीचे स्थित ज्वालामुखियों की निगरानी करना बेहद कठिन काम है। प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में ऐसे सैकड़ों ज्वालामुखी मौजूद हैं, लेकिन उनकी गतिविधियों और विस्फोट के समय प्रतिक्रिया देने के तरीकों के बारे में हमारी जानकारी अभी बहुत सीमित है।
उपग्रह गर्मी और गैसों के उत्सर्जन में बदलाव के साथ-साथ बादलों से दृश्यता बाधित न होने पर विस्फोट से उठने वाले गुबार का पता लगा सकते हैं। ये जानकारियां समय रहते ज्वालामुखी विस्फोट की चेतावनी देने और विमानों की सुरक्षा में मदद कर सकती हैं।
लेकिन उपग्रह यह नहीं बता सकते कि क्या घातक सुनामी आने वाली है। पारंपरिक भूकंप मापक यंत्र भी हमेशा मददगार साबित नहीं होते।
वर्ष 2022 के विस्फोट के दौरान हुंगा के सबसे नजदीक स्थित भूकंप मापक यंत्र फिजी में था, जो वहां से करीब 750 किलोमीटर दूर था। इतनी दूरी पर ज्वालामुखी से जुड़ी कई भूकंपीय तरंगें पृथ्वी के भीतर से ठीक तरह से प्रसारित नहीं हो पातीं।
इसलिए इसके बजाय हमने यह पता लगाने की कोशिश की कि समुद्र के भीतर हुंगा ज्वालामुखी की गतिविधियां क्या संकेत दे रही थीं।
समुद्र के भीतर ध्वनि, जल-ध्वनि संकेतों के रूप में, जिन्हें तृतीयक तरंगें या टी-तरंगें कहा जाता है, बहुत लंबी दूरी तक बेहद प्रभावी तरीके से यात्रा करती है। समुद्र तल से ऊपर उठा हुआ कोई अलग-थलग ज्वालामुखी एक घंटी की तरह काम कर सकता है, जो समुद्र के भीतर होने वाली हिंसक गतिविधियों की ध्वनियों को आसपास के समुद्र में फैला देता है।
हमने दक्षिण-पश्चिम प्रशांत क्षेत्र के आसपास स्थित 14 भूकंपीय केंद्रों के रिकॉर्ड का दोबारा विश्लेषण किया। इनमें से कुछ केंद्र हुंगा ज्वालामुखी से 2,600 किलोमीटर तक दूर स्थित थे।
विस्फोट के पहले घंटे के दौरान हम समुद्र के भीतर ज्वालामुखी की ढलानों से तेजी से नीचे खिसक रहे भूस्खलन के प्रवाह की आवाजों को ‘‘सुन’’ सके। ये प्रवाह इतने शक्तिशाली थे कि उन्होंने समुद्र के भीतर बिछी संचार केबलों को भी नुकसान पहुंचाया और इनसे उत्पन्न ध्वनि संकेतों का पता सैकड़ों किलोमीटर दूर तक लगाया जा सका।
(द कन्वरसेशन) शफीक नरेश
नरेश