पलक्कड़ (केरल), 13 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस और उसकी युवा इकाई के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को चित्तूर में बिजली मंत्री के. कृष्णनकुट्टी के कार्यालय तक एक विरोध मार्च निकाला। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यह विरोध प्रदर्शन बांधों के अनुचित प्रबंधन के आरोपों के खिलाफ किया, जिसके कारण 2018 की विनाशकारी बाढ़ आई थी जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी।
कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुझलनदन ने हाल ही में एक कथित ऑडियो क्लिप जारी किया है, जिसमें कृष्णनकुट्टी को पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली पहली सरकार के कार्यकाल के दौरान आई बाढ़ के लिए तत्कालीन जल संसाधन मंत्री मैथ्यू टी थॉमस और बिजली बोर्ड के अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए सुना जा सकता है।
प्रदर्शनकारियों के पीछे हटने से इनकार करने पर पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया।
प्रदर्शनकारियों ने मंत्री से एक स्पष्टीकरण मांगा और उनके इस्तीफे की मांग की, हालांकि विधानसभा चुनाव के बाद फिलहाल कार्यवाहक सरकार ही बनी हुई है।
कृष्णनकुट्टी ने चुनाव नहीं लड़ा था और इंडियन सोशलिस्ट जनता दल ने चित्तूर से वी मुरुकादास को मैदान में उतारा था।
कांग्रेस उम्मीदवार सुमेष अच्युतन भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
उन्होंने आरोप लगाया, “कृष्णनकुट्टी 2018 की बाढ़ के पीछे की साजिश में शामिल थे। उन्होंने उन कार्यों का समर्थन किया जिनके कारण एक ऐसी आपदा आई जिसमें लगभग 500 लोग मारे गए और 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।”
अच्युतन ने आरोप लगाया कि बाढ़ से संबंधित अनियमितताओं से अवगत होने के बावजूद, कृष्णनकुट्टी ने थॉमस के साथ एक सौदा किया और पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली दूसरी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार में बिजली मंत्री का पद हासिल किया।
अच्युतन ने कहा, “उनकी संलिप्तता बिल्कुल स्पष्ट है। इस ऑडियो क्लिप से यह स्पष्ट है कि विधानसभा में 2018 की बाढ़ के बारे में प्रस्तुत जानकारी भ्रामक थी।”
ऑडियो क्लिप जारी होने के बाद, कृष्णनकुट्टी ने आरोपों का खंडन करते हुए दावा किया कि उन्होंने कभी ऐसे बयान नहीं दिए और क्लिप संभवत: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिये बनाई गई होगी।
भाषा अमित मनीषा
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