पेमा खांडू के परिजन से जुड़ी कंपनियों को ठेके देने का मामला : सीबीआई से नयी वस्तुस्थिति रिपोर्ट तलब

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पेमा खांडू के परिजन से जुड़ी कंपनियों को ठेके देने का मामला : सीबीआई से नयी वस्तुस्थिति रिपोर्ट तलब

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  • Publish Date - August 24, 2026 / 06:49 PM IST,
    Updated On - August 24, 2026 / 06:49 PM IST

नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेशण ब्यूरो (सीबीआई) को अरुणाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिजन के मलिकाना हक वाली या उनसे जुड़ी कंपनियों को ठेकों के आवंटन में तरजीह दिए जाने के आरोपों की शुरुआती जांच के सिलसिले एक नयी वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का सोमवार को निर्देश दिया।

अरुणाचल प्रदेश सरकार ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ को बताया कि उसने शीर्ष अदालत के निर्देश का पालन करते हुए सीबीआई को जरूरी रिकॉर्ड और दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं।

सीबीआई ने उच्चतम न्यायालय में पिछले महीने दाखिल वस्तुस्थिति रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि राज्य सरकार अदालत के निर्देश के मुताबिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में सहयोग नहीं कर रही है।

अरुणाचल प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को पीठ से कहा, “मुझे (राज्य सरकार को) तथ्यों को रिकॉर्ड पर पेश करने के लिए एक हफ्ते का समय चाहिए।”

उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के तीन अगस्त के आदेश के अनुसार अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (गृह) अदालत में मौजूद हैं।

मेहता ने कहा, “हम अदालत को संतुष्ट कर पाएंगे कि इन निर्देशों का अक्षरशः और उनकी मूल भावना के अनुरूप पालन किया गया है।”

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जांच एजेंसी को सभी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं।

पीठ ने सीबीआई से इस बात की पुष्टि करने को कहा कि क्या उसे संबंधित दस्तावेज मिल गए हैं।

उसने कहा कि वह राज्य को अपना पक्ष रिकॉर्ड पर रखने के लिए दो हफ्ते का समय देगी।

शीर्ष अदालत ने छह अप्रैल को सीबीआई को निर्देश दिया था कि वह अरुणाचल प्रदेश में ठेकों के पक्षपातपूर्ण आवंटन से जुड़े आरोपों की दो हफ्ते के भीतर शुरुआती जांच शुरू करे।

न्यायालय ने यह आदेश ‘सेव मोन रीजन फेडरेशन’ और ‘वॉलंटरी अरुणाचल सेना’ नाम के गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की याचिका पर दिया था, जिसमें मामले की सीबीआई या विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने का अनुरोध किया गया था।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सोमवार को पूछा कि क्या सीबीआई की शुरुआती जांच में अब तक इकट्ठा और जांची गई सामग्री एक नियमित मामला दर्ज करने के लिए काफी नहीं है।

पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार सीबीआई को करना है।

न्यायालय ने मामले से जुड़ी एक अलग याचिका पर भी सुनवाई करने के लिए सहमति जताई। उसने मेहता से निर्देश लेने और जरूरत पड़ने पर जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा।

पीठ ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (गृह) ने भी हलफनामा दाखिल किया है। उसने याचिकाकर्ताओं को दो हफ्ते के भीतर हलफनामे का जवाब दाखिल करने की इजाजत दे दी।

सुनवाई के आखिर में भूषण ने पीठ से अनुरोध किया कि वह सीबीआई को सुनवाई की अगली तारीख तक एक नयी वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दे।

पीठ ने कहा, “सीबीआई को भी एक नयी वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।”

भाषा पारुल दिलीप

दिलीप