नौकरी नियमित करने की मांग को लेकर बंगाल में संविदा आईसीटी स्कूल शिक्षकों का घंटों प्रदर्शन

Ads

नौकरी नियमित करने की मांग को लेकर बंगाल में संविदा आईसीटी स्कूल शिक्षकों का घंटों प्रदर्शन

  •  
  • Publish Date - September 28, 2026 / 08:15 PM IST,
    Updated On - September 28, 2026 / 08:15 PM IST

कोलकाता, 28 सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत करीब 1,000 सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) शिक्षकों ने नौकरी नियमित करने की मांग को लेकर सोमवार को यहां साल्ट लेक स्थित शिक्षा विभाग मुख्यालय के पास सात घंटे से अधिक समय तक प्रदर्शन किया।

आईसीटी शिक्षकों के एक प्रवक्ता ने बताया कि निजी एजेंसियों के माध्यम से संविदा व्यवस्था के तहत नियुक्त किए गए इन शिक्षकों की सेवाएं 30 सितंबर को समाप्त होने वाली हैं।

आईसीटी ऐक्यो मंच के प्रवक्ता बाबई घोष ने कहा, ‘एजेंसियों ने हमें नौ अक्टूबर तक सभी संबंधित दस्तावेज संगठनों को सौंपने के लिए भी कहा है। हम अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा, ‘जब लोग दुर्गा पूजा से पहले बोनस प्राप्त करते हैं, तब हमें सेवा समाप्ति पत्र मिल रहे हैं।’

कुछ साल पहले पांच साल के अनुबंध पर कई निजी एजेंसियों के माध्यम से 3,000 से अधिक कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी।

इनमें से कुछ का कार्यकाल इस साल समाप्त होना था, जबकि कुछ अन्य का अनुबंध 2027 की शुरुआत में पूरा होना था।

घोष ने कहा कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने भर्ती प्रक्रिया के पहले पांच चरणों में नियुक्त शिक्षकों का कार्यकाल 60 वर्ष की आयु तक बढ़ा दिया था, लेकिन छठे और सातवें चरण में नियुक्त शिक्षक अब भी संविदा पर हैं।

उन्होंने कहा, ‘हम सरकार से अपने रोजगार की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप करने और हमारी सेवाओं को नियमित करने या कार्यकाल बढ़ाने की मांग करते हैं।’

उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी या स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन से बातचीत के लिए मिलने की अपील की। उन्होंने कहा कि उन्हें नयी सरकार से काफी उम्मीदें हैं।

घोष ने कहा, ‘हम संविदा पर काम करने वाले सरकारी शिक्षकों के लिए 32,000 रुपये प्रति माह वेतन की मांग करते हैं।’ उन्होंने कहा कि आईसीटी प्रशिक्षकों को अभी केवल 7,000 रुपये प्रति माह मिलते हैं।

प्रदर्शन पूर्वाह्न करीब 11 बजे प्रमुख करुणामयी चौराहे के पास शुरू हुआ और खबर लिखे जाने तक जारी था, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।

प्रदर्शनकारी करुणामयी में सड़क के एक हिस्से पर बैठ गए और ‘हमें न्याय चाहिए’ जैसे नारे लगाए, जबकि पुलिस बल वहां तैनात रहा।

स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब कुछ प्रदर्शनकारी सड़क पर लेट गए और विकास भवन (शिक्षा विभाग मुख्यालय) की ओर बढ़ने की कोशिश के दौरान पुलिसकर्मियों से उनकी झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों ने खाली प्लेटें सड़क पर बजाते हुए कहा, ‘इस पूजा में हम क्या खाएंगे?’

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से कानून अपने हाथ में नहीं लेने की अपील की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने विकास भवन के बंद गेट पर चढ़कर अंदर जाने की कोशिश भी की।

घोष ने कहा, ‘हम शांतिपूर्ण तरीके से शिक्षा सचिव को अपना ज्ञापन सौंपना चाहते हैं, लेकिन कोई हमारी बात नहीं सुन रहा है।’

उन्होंने बताया कि वह दक्षिण 24 परगना के एक माध्यमिक स्कूल में काम करते हैं।

इस बीच, प्रदर्शनकारियों को सरकारी कार्यालयों की ओर बढ़ने से रोकने के लिए इलाके में बैरिकेड लगाए गए थे और पुलिस बल को तैयार रखा गया था।

ऐक्यो मंच के अनुसार, विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से छठे और सातवें चरण के तहत करीब 3,719 कंप्यूटर शिक्षक कार्यरत हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई वर्षों तक काम करने के बावजूद उन्हें सीधे सरकारी संविदा व्यवस्था में शामिल करने के बजाय अब भी निजी एजेंसियों के कर्मचारी के रूप में रखा गया है।

घोष ने कहा, ‘पहले से पांचवें चरण तक नियुक्त शिक्षकों को सरकारी संविदा कर्मचारी के रूप में नियुक्ति का लाभ मिल चुका है। हम भी वर्षों से काम कर रहे हैं, लेकिन अब भी एजेंसी व्यवस्था के तहत हैं।’

शिक्षकों ने एजेंसी आधारित भर्ती व्यवस्था खत्म करने और उन्हें सीधे सरकारी संविदा कर्मचारी के रूप में नियुक्त करने की मांग की है।

यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब नई निविदा प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

भाषा अमित नरेश

नरेश