देश के पहले निजी कक्षीय रॉकेट ने तकनीकी पेलोड को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया

देश के पहले निजी कक्षीय रॉकेट ने तकनीकी पेलोड को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया

देश के पहले निजी कक्षीय रॉकेट ने तकनीकी पेलोड को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया
Modified Date: July 18, 2026 / 01:16 pm IST
Published Date: July 18, 2026 1:16 pm IST

(जेमिमा रमन)

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 18 जुलाई (भाषा) भारत में निजी क्षेत्र द्वारा विकसित पहले कक्षीय रॉकेट ‘विक्रम-1’ ने शनिवार को कई तकनीकी पेलोड और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पोस्टकार्ड सहित विभिन्न पोस्टकार्ड को सफलतापूर्वक पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचाया।

‘मिशन आगमन’ नाम से संचालित इस मिशन के साथ भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने पहली बार उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने वाले वैश्विक बाजार में औपचारिक रूप से प्रवेश कर लिया। इस मिशन का संचालन हैदराबाद से संचालित निजी कंपनी ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ ने किया।

कंपनी ने इस मिशन को ‘‘बड़ी सफलता’’ करार दिया।

अपने पहले अभियान में चार चरणों वाला और सात मंजिला इमारत जितना ऊंचा ‘विक्रम-1’ रॉकेट शनिवार को बादलों से घिरे मौसम के बीच दोपहर 12 बजकर पांच मिनट पर यहां स्थित पहले प्रक्षेपण परिसर से सफलतापूर्वक रवाना हुआ। प्रक्षेपण के दौरान रॉकेट से नारंगी रंग का धुआं निकला और इस अंतरिक्ष केंद्र से एक नए युग की शुरुआत हुई।

इससे पहले नेविगेशन प्रणाली से जुड़ी संभावित समस्या के कारण प्रक्षेपण को ‘‘अस्थायी रूप से रोक’’ (प्लान्ड होल्ड) दिया गया था, जिसके कारण प्रक्षेपण निर्धारित समय पूर्वाह्न 11:30 बजे के बजाय 12 बजकर पांच मिनट पर किया गया।

उड़ान भरने के बाद ग्राहा स्पेस, कॉसमोसर्व, डीक्यूब्ड और स्काईरूट के ‘स्कोप’ के तकनीकी परीक्षण के लिए तैयार छोटे उपग्रहों और उपकरणों को क्रमवार 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) में स्थापित किया गया।

रॉकेट ने एक सूक्ष्म कलाकृति, 18 कैरेट सोने से बना एक सूक्ष्म रॉकेट, तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हाथों से लिखा ‘‘वंदे मातरम्’’ संदेश वाला पोस्टकार्ड भी सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचाया। इसके साथ ही इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के पोस्टकार्ड भी भेजे गए।

कंपनी ने बताया कि इस सूक्ष्म कलाकृति पेलोड में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के अग्रणी वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई, वैज्ञानिक सर सी. वी. रमन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की सूक्ष्म प्रतिमाएं शामिल हैं। इन्हें ‘‘भारत की वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्रा को दिशा देने वाले तीन दूरदर्शी शख्सियतों को श्रद्धांजलि’’ के रूप में तैयार किया गया है।

कंपनी ने कहा, ‘‘स्काईरूट ने गर्व के साथ अपने रॉकेटों और इंजनों का नाम इन्हीं महान विभूतियों के नाम पर रखा है।’’

स्काईरूट एयरोस्पेस ने कहा कि इस परीक्षण उड़ान के दौरान प्राप्त इंजीनियरिंग आंकड़ों का विश्लेषण कर रॉकेट की मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणालियों की कार्यक्षमता का सत्यापन किया जाएगा। साथ ही इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य के वाणिज्यिक उपग्रह मिशनों के लिए आवश्यक तकनीकी सुधार किए जाएंगे।

शनिवार को संचालित इस मिशन के साथ स्काईरूट एयरोस्पेस ने ‘विक्रम-1’ प्रक्षेपण यान की पहली उड़ान के जरिए अपनी कक्षीय प्रक्षेपण क्षमता का सफल प्रदर्शन किया। इसके साथ ही कंपनी ने वर्ष 2022 में ‘विक्रम-एस’ मिशन के तहत हासिल की गई उप-कक्षीय उड़ान की उपलब्धि से आगे बढ़ते हुए एक नया मुकाम हासिल किया।

इस सफल उड़ान ने वास्तविक उड़ान परिस्थितियों में रॉकेट की पूर्ण कार्बन कंपोजिट संरचना और थ्री-डी प्रिंटेड इंजनों के प्रदर्शन को प्रमाणित किया। कंपनी का दावा है कि ये दोनों तकनीकें अपने प्रकार की ‘‘पहली’’ प्रौद्योगिकी हैं।

स्काईरूट एयरोस्पेस के दोनों संस्थापक पवन कुमार चांदना और नागा भरत डाका, दोनों भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व वैज्ञानिक हैं। प्रक्षेपण के दौरान दोनों इसरो प्रमुख वी. नारायणन के साथ इसरो के मिशन नियंत्रण केंद्र (एमसीसी) में मौजूद थे। इसरो के पूर्व अध्यक्षों, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला तथा आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने भी एमसीसी से इस प्रक्षेपण को देखा।

यह ऐतिहासिक उपलब्धि तेजी से बढ़ रहे वैश्विक लघु उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत करने तथा इसरो के साथ-साथ अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की उपस्थिति का विस्तार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

‘विक्रम-1’ के साथ भेजे गए पेलोड में कॉसमोसर्व स्पेस का ‘एम्ब्रेस’ मिशन शामिल है। यह कक्षा में रोबोटिक भुजाओं (यांत्रिक हाथों) के प्रदर्शन से जुड़ा मिशन है, जिनका उद्देश्य अंतरिक्ष में मौजूद मलबे को हटाने की क्षमता का परीक्षण करना है।

इसके अलावा ग्राहा स्पेस का ‘सोलारस’ भी भेजा गया। यह एक कॉम्पैक्ट उपग्रह मिशन है, जिसे पृथ्वी की निचली कक्षा में नई तकनीकी क्षमताओं के प्रदर्शन के लिए विकसित किया गया है।

कंपनी के अनुसार, स्काईरूट एयरोस्पेस का ‘स्कोप’ उपग्रह एक आंतरिक प्रायोगिक पेलोड है, जिसे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में उपयोग होने वाली प्रौद्योगिकियों के परीक्षण के लिए विकसित किया गया है।

इसके अलावा कॉसमोस डायमंड्स द्वारा तैयार ‘कॉस्मिक ब्लूम’, जो प्रयोगशाला में तैयार हीरे पर आधारित एक कलात्मक कृति है, तथा जर्मनी की कंपनी डीक्यूब्ड के परीक्षण पेलोड ‘यूडी3पीपी’ और ‘एमडी3आरएन’ भी शनिवार को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंच गए।

भाषा गोला वैभव

वैभव


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