(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को नीट-पीजी (स्नातकोत्तर मेडिकल प्रवेश परीक्षा) 2026 दोबारा कराने की अनुरोध वाली जनहित याचिका खारिज कर दी तथा ऐसी याचिका दायर करने को लेकर याचिकाकर्ताओं और उनके वकील को फटकार भी लगाई एवं उन पर जुर्माना लगाया।
न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की खंडपीठ ने कहा कि वह ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ से कहेगी कि वह कानून की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल करने वाले इन वकील के खिलाफ कार्रवाई करे।
उच्चतम न्यायालय ने वकील से कहा,‘‘ऐसा लगता है कि यह व्यक्ति पूर्णकालिक याचिकाकर्ता बन गया है। जहां भी परीक्षाएं होती हैं, आप याचिकाएं दायर करने पहुंच जाते हैं। आपने पहले स्थगन के लिए याचिका क्यों दायर की थी? क्या यह आपके कहने पर किया गया था या याचिकाकर्ता सच में इसे दायर करने में इच्छुक थे? हम बार काउंसिल ऑफ इंडिया से आपके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए कहेंगे।’’
याचिकाकर्ताओं ने सभी विद्यार्थियों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का अनुरोध किया था। उनका आरोप था कि मई 2025 के उस आदेश का उल्लंघन हुआ है, जिसमें अदालत ने नीट-पीजी एक ही पाली में कराने का निर्देश दिया था।
खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
वकील ने तर्क दिया कि जयपुर में बिजली गुल होने के कारण लगभग 2,500 उम्मीदवार अपनी परीक्षा पूरी नहीं कर पाए थे और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड ने बाद में इन अभ्यर्थियों के लिए दूसरी परीक्षा की घोषणा की, जो पांच सितंबर को होनी है।
बोर्ड की ओर से पेश वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता नोएडा और पंजाब से हैं तथा वे इस व्यवधान से बिल्कुल भी प्रभावित नहीं हुए थे।
बोर्ड के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील ने सोशल मीडिया पर सभी अभ्यर्थियों से राय और मामलों की जानकारी मांगी है, जिससे समस्या पैदा हो गई है।
उन्होंने कहा कि पूरे भारत में 1,111 परीक्षा केंद्र हैं, और बिजली जाने की वजह से जयपुर के सिर्फ़ दो केंद्रों पर ही दिक्कत हुई।
न्यायमूर्ति अराधे ने पूछा कि क्या मौजूदा जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता परीक्षा में शामिल होना चाहते थे; इस पर वकील ने कहा कि नहीं।
न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा, ‘‘हम बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया से आपके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए कहेंगे।’’
भाषा
राजकुमार नरेश
नरेश