उप्र के मंत्री सुरेश खन्ना के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका खारिज
उप्र के मंत्री सुरेश खन्ना के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका खारिज
प्रयागराज, तीन सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना को राहत देते हुए बृहस्पतिवार को उनके खिलाफ दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।
याचिकाकर्ताओं ने मथुरा की एमपी-एमएलए अदालत के उस आदेश को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की थी जिसमें निचली अदालत ने खन्ना के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश जारी करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी।
न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने सनातन धर्म रक्षापीठ और कौशल किशोर ठाकुर जी महाराज द्वारा दायर याचिका खारिज की।
तथ्यों के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं ने मथुरा की अदालत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 173(4) के तहत आवेदन दाखिल किया था। जब पुलिस थाने का अधिकारी प्राथमिकी दर्ज करने से मना कर देता है तो इस धारा के तहत कानूनी उपचार अपनाया जाता है।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, संत कुटी मानव सेवा संस्थान के नाम पूर्व में दर्ज एक जमीन के विवाद के संबंध में निर्विकार सिंघल नामक व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी, 166, 420, 467, 471 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
इस मामले की जांच मेरठ में उप्र सतर्कता विभाग द्वारा की जा रही है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि प्रदेश के कैबिनेट मंत्री खन्ना इस जांच में हस्तक्षेप कर रहे हैं, इसलिए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आवेदन किया गया।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए अदालत), मथुरा ने छह जून, 2025 को यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि स्वयं याचिकाकर्ता के अनुसार संपत्ति के विवाद में मामला मेरठ में दर्ज किया गया है और इस मामले की जांच मेरठ के सतर्कता विभाग द्वारा की जा रही है। इसलिए यदि खन्ना द्वारा किसी तरह के हस्तक्षेप का आरोप है तो इसके लिए कार्रवाई मेरठ में बनती है ना कि मथुरा में।
भाषा सं राजेंद्र शफीक
शफीक

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