एनएचआरसी प्रशासन को बंधुआ मजूदरी की पहचान एवं रोकथाम में मदद के लिए एसओपी बनायेगा

एनएचआरसी प्रशासन को बंधुआ मजूदरी की पहचान एवं रोकथाम में मदद के लिए एसओपी बनायेगा

एनएचआरसी प्रशासन को बंधुआ मजूदरी की पहचान एवं रोकथाम में मदद के लिए एसओपी बनायेगा
Modified Date: September 3, 2026 / 10:36 pm IST
Published Date: September 3, 2026 10:36 pm IST

गांधीनगर, तीन सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह गुजरात में प्रशासन को बंधुआ मजदूरी की पहचान करने और उसे रोकने में मदद करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करेगा।

आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन ने कहा कि गुजरात में एनएचआरसी की दो दिन की सुनवाई के दौरान बंधुआ मज़दूरी के 27 मामलों पर विचार किया गया।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों को बंधुआ मजदूरी से जुड़े कानूनी अनुमान के बारे में जागरूक किया गया—खासकर उन मामलों में जहां मजदूरों को अग्रिम पैसे देकर काम पर रखा जाता है।

एनएचआरसी ने दो और तीन सितंबर को गांधीनगर में राष्ट्रीय अपराध विज्ञान विश्वविद्यालय में अपनी ‘पूर्ण आयोग शिविर बैठक और खुली सुनवाई’ आयोजित की।

अध्यक्ष ने कहा कि बंधुआ मज़दूरी का मुद्दा ईंट-भट्टों जैसे मौसमी उद्योगों में खास तौर पर अहम है, क्योंकि इनमें आम तौर पर प्रवासी मज़दूर काम करते हैं और अक्सर अधिकारियों के निरीक्षण के समय वे वहां से चले जाते हैं।

अध्यक्ष ने कहा कि कानून के तहत, अगर अग्रिम भुगतान के साथ यह शर्त जुड़ी हो कि श्रमिक को एक तय समय तक काम करना होगा या तय मात्रा में उत्पादन करना होगा, तो इसे बंधुआ मज़दूरी माना जा सकता है, भले ही यह देखने में वैसा न लगे।

उन्होंने कहा, ‘‘हम अब ‘बंधुआ मज़दूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम’ को ठीक से लागू करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया बनाने की कोशिश कर रहे हैं।’’

भाषा

राजकुमार रंजन

रंजन


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