अदालत ने आतंकी हमले के पीड़ितों, परिजनों के लिए आरक्षण की मांग वाली याचिका ठुकराई

अदालत ने आतंकी हमले के पीड़ितों, परिजनों के लिए आरक्षण की मांग वाली याचिका ठुकराई

अदालत ने आतंकी हमले के पीड़ितों, परिजनों के लिए आरक्षण की मांग वाली याचिका ठुकराई
Modified Date: April 29, 2026 / 09:39 pm IST
Published Date: April 29, 2026 9:39 pm IST

नयी दिल्ली, 29 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को आतंकी हमलों के पीड़ितों और इस तरह की घटनाओं में मारे जाने वाले लोगों के परिजनों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण एवं अन्य लाभों के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने राय व्यक्त की कि नीतिगत निर्णय होने के कारण ऐसे मुद्दे न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं, और याचिकाकर्ता ‘साउथ एशियन फोरम फॉर पीपल अगेंस्ट टेरर’ को संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपना अभिवेदन प्रस्तुत करने को कहा।

पीठ ने कहा, ‘‘सरकारी नौकरियों में दो प्रतिशत आरक्षण? पहले से मौजूद अधिकारों की रक्षा और नए अधिकारों के सृजन में अंतर होता है… यह सब नीतिगत मामला है। क्या न्यायालय इस तरह के निर्देश जारी कर सकते हैं?’’

इसने कहा, “याचिका में की गई सभी प्रार्थनाएँ नीतिगत निर्णयों के दायरे में आती हैं, जो मुख्य रूप से सरकार का अधिकार और विशेषाधिकार है। तदनुसार, दावे के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना, हम याचिकाकर्ता को उचित प्राधिकारी के समक्ष शिकायतों के निवारण के लिए अभिवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति देते हैं।’’

अदालत ने कहा कि इस तरह का कोई भी अभिवेदन मिलने पर प्राधिकारी इस पर गौर करेंगे।

याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने दिल्ली में हुए आतंकी हमलों के पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा के लिए जनहित याचिका दायर की है।

याचिका में आतंकवादी हमलों/बम विस्फोटों/नक्सल हिंसा के पीड़ितों के लिए मुआवजे में वृद्धि, चिकित्सा सहायता और सरकारी सेवाओं में दो प्रतिशत आरक्षण देने का अनुरोध किया गया।

भाषा

नेत्रपाल माधव

माधव


लेखक के बारे में