टी20 विश्व कप में बांग्लादेश को खेलने से रोकने के लिये याचिका दायर करने पर अदालत ने लगाई फटकार

टी20 विश्व कप में बांग्लादेश को खेलने से रोकने के लिये याचिका दायर करने पर अदालत ने लगाई फटकार

टी20 विश्व कप में बांग्लादेश को खेलने से रोकने के लिये याचिका दायर करने पर अदालत ने लगाई फटकार
Modified Date: January 21, 2026 / 04:05 pm IST
Published Date: January 21, 2026 4:05 pm IST

नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक विधि छात्रा को आगामी पुरुष टी20 विश्व कप में बांग्लादेश की भागीदारी को रोकने के उद्देश्य से जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने के लिए फटकार लगाई।

याचिका में छात्रा ने बांग्लादेश की अल्पसंख्यक हिंदू आबादी के खिलाफ अत्याचार के कारण वहां की टीम को खेलने की इजाजत न दिये जाने का अनुरोध किया था।

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति तभी दे, जब यह पुष्टि हो जाए कि देश किसी भी मानवाधिकार का उल्लंघन नहीं कर रहा है।

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सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने याचिका के पीछे के तर्क पर सवाल उठाया। उन्होंने याचिकाकर्ता की वकील देवयानी सिंह से पूछा, “यह किस तरह की याचिका है? जो भी विचार आपके मन में आता है, वही रिट याचिका का विषय बन जाता है?”

याचिका में आईसीसी से बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यवस्थित उत्पीड़न, लक्षित हिंसा, भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या, मंदिर को अपवित्र करने और अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच, परीक्षण और दस्तावेजीकरण करने और एक निर्धारित समय सीमा के भीतर इस माननीय न्यायालय को एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एक स्वतंत्र आयोग गठित करने का भी अनुरोध किया गया था।

पीठ ने इस बात की जांच की कि क्या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं का आयोजन करने वाली आईसीसी को उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के अधीन किया जा सकता है और याचिकाकर्ता को जनहित याचिका पर आगे बढ़ने में सावधानी बरतने की सलाह दी।

अदालत ने याचिकाकर्ता को अपना समय और अदालत के संसाधनों को बर्बाद करने के बजाय “रचनात्मक कार्य” करने और “कुछ अच्छे मुद्दे उठाने” के लिए कहा।

अदालत ने कहा, “आप कानून की छात्रा हैं। यह सब क्या है? जरा सोचिए। इस तरह की याचिकाएं दायर करके आप अदालत का समय बेवजह बर्बाद कर रही हैं। समय बर्बाद करने के बजाय कुछ रचनात्मक काम कीजिए। अगर आप जिद करती हैं, तो हम आप पर भारी जुर्माना लगा देंगे।”

अंततः अदालत ने याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।

भाषा प्रशांत दिलीप

दिलीप


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