बकरीद के लिए बंगाल के पशुवध नियमों से छूट के अनुरोध वाली याचिकाओं पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा

बकरीद के लिए बंगाल के पशुवध नियमों से छूट के अनुरोध वाली याचिकाओं पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा

बकरीद के लिए बंगाल के पशुवध नियमों से छूट के अनुरोध वाली याचिकाओं पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा
Modified Date: May 21, 2026 / 03:43 pm IST
Published Date: May 21, 2026 3:43 pm IST

कोलकाता, 21 मई (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अगले सप्ताह मनाए जाने वाले ईद उल अजहा के दौरान पशु वध पर पश्चिम बंगाल सरकार की हालिया अधिसूचना को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को फैसला सुरक्षित रख लिया।

याचिकाकर्ताओं ने बकरीद पर कुर्बानी करने के लिए पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 की धारा 12 के तहत छूट का अनुरोध किया है।

एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने अदालत के समक्ष दलील दी कि यह अधिनियम 1950 में बनाया गया था, जब कृषि घरेलू पशुओं पर निर्भर थी, लेकिन वर्तमान में खेती के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अधिनियम की धारा 12 धार्मिक उद्देश्यों के लिए छूट प्रदान करती है।

भट्टाचार्य ने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों में मवेशियों की संख्या में अच्छी वृद्धि हुई है।

इन याचिकाओं का विरोध करते हुए, राज्य और केंद्र के वकीलों ने कहा कि कुछ प्रतिबंध लगाने वाली अधिसूचना अधिनियम के प्रावधानों और इस उच्च न्यायालय के 2018 और 2022 के निर्णयों के अनुसार जारी की गई थी।

उन्होंने बताया कि अधिसूचना में दिए गए प्रावधानों के अनुसार, मवेशियों की उम्र और स्वास्थ्य की जांच कानून के अनुसार की जानी चाहिए।

पश्चिम बंगाल सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर अधिकारियों से ‘स्वास्थ्य प्रमाणपत्र’ प्राप्त किए बिना पशु वध पर रोक लगा दी है और निर्देशों का पालन न करने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।

राज्य ने यह भी स्पष्ट किया है कि खुले सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध ‘‘प्रतिबंधित’’ होगा।

भाषा शफीक मनीषा

मनीषा


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