अदालत ने सिद्धार्थ वरदराजन का पीआईओ दर्जा बदलने के संबंध में केंद्र के फैसले को खारिज किया

अदालत ने सिद्धार्थ वरदराजन का पीआईओ दर्जा बदलने के संबंध में केंद्र के फैसले को खारिज किया

अदालत ने सिद्धार्थ वरदराजन का पीआईओ दर्जा बदलने के संबंध में केंद्र के फैसले को खारिज किया
Modified Date: May 12, 2026 / 04:00 pm IST
Published Date: May 12, 2026 4:00 pm IST

नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने ‘द वायर’ के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन की याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को केंद्र सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें उनके ‘भारतीय मूल के निवासी’ (पीआईओ) के दर्जे को ‘प्रवासी भारतीय नागरिक’ (ओसीआई) में बदलने की मांग ठुकरा दी गई थी। अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार के इस इनकार में कोई कारण नहीं बताया गया।

न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने अमेरिकी पत्रकार के आवेदन को बहाल कर दिया और अधिकारियों से कानून के अनुसार इस पर नए सिरे से निर्णय लेने और तर्कसंगत आदेश पारित करने को कहा।

न्यायमूर्ति कौरव ने कहा, ‘‘अदालत ने आदेश का अवलोकन करने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता के पीआईओ को ओसीआई में बदलने के अनुरोध को खारिज कर दिया गया। हालांकि, इस संबंध में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि आवेदन पर अनुकूल निर्णय क्यों नहीं लिया जा सका।’’

अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘जब तक प्रतिवादी कारण नहीं बताएगा, तब तक अपीलीय अदालत मामले को सही ढंग से समझ नहीं पाएगी। कारण किसी भी आदेश का आधार होते हैं… इसलिए संबंधित आदेश को रद्द किया जाता है। याचिकाकर्ता का आवेदन फिर से बहाल किया जाता है। अब इसपर कानून के अनुसार विचार किया जाए और उचित आदेश पारित किया जाए।’’

केंद्र सरकार की ओर से पेश महिला वकील ने निर्देश लेने के लिए समय देने का अदालत से अनुरोध किया, लेकिन इसने (अदालत ने) स्पष्ट कहा कि आवेदन खारिज करने का फैसला टिक नहीं सकता।

अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा, ‘‘आपको इस पर पुनर्विचार करना होगा। यह आदेश मान्य नहीं हो सकता। कृपया कोई तर्कसंगत आदेश पारित करें।’’

अदालत ने वरदराजन की विदेश यात्रा की अनुमति से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के लिए मामले को बुधवार के लिए सूचीबद्ध किया। साथ ही, अदालत ने केंद्र सरकार की वकील से इस मुद्दे पर निर्देश लेने के लिए कहा।

पत्रकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने बताया कि वह भारत में रहने वाले पीआईओ कार्ड धारक हैं और उनकी जड़ें भारत से जुड़ी हैं। वकील ने दलील दी कि वर्ष 2015 के बाद सभी पीआईओ कार्ड स्वतः ही ओसीआई कार्ड माने गए थे, लेकिन उनका पीआईओ कार्ड पढ़ने योग्य नहीं रह गया, जिसके कारण उन्हें इसे ओसीआई में बदलने के लिए आवेदन करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि केंद्र ने वरदराजन के पीआईओ कार्ड को ओसीआई में बदलने के अनुरोध को ठुकरा दिया और दो अप्रैल को उन्हें पत्र भेजा।

वरिष्ठ वकील ने अदालत में कहा, ‘‘उनका (वरदराजन का) जन्म भारतीय माता-पिता से हुआ है। उनकी पत्नी भी भारतीय हैं। वह 1995 से लगातार भारत आते-जाते रहे हैं। उनका पीआईओ कार्ड 2032 तक वैध है, लेकिन यह मशीन से पढ़ा जाने योग्य (मशीन रीडेबल) नहीं है।’’

भाषा आशीष सुरेश

सुरेश


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