मट्टू हत्याकांड के अभियुक्त से अदालत ने कहा: इस मामले में तटस्थ एवं न्यायसंगत फैसला किया जायेगा

मट्टू हत्याकांड के अभियुक्त से अदालत ने कहा: इस मामले में तटस्थ एवं न्यायसंगत फैसला किया जायेगा

मट्टू हत्याकांड के अभियुक्त से अदालत ने कहा: इस मामले में तटस्थ एवं न्यायसंगत फैसला किया जायेगा
Modified Date: April 16, 2026 / 06:19 pm IST
Published Date: April 16, 2026 6:19 pm IST

नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1996 के प्रियदर्शिनी मट्टू बलात्कार-हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे संतोष कुमार सिंह को बृहस्पतिवार को आश्वासन दिया कि उसकी समय-पूर्व रिहाई के मुद्दे पर उसके साथ ‘तटस्थ एवं पूर्वाग्रह के बिना’ निर्णय किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सजा समीक्षा बोर्ड जन-धारणा के अनुरूप निर्णय ले रहा है।

न्यायमूर्ति अनूप जे. भंभानी ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि अपराध जघन्य था और मृत महिला के परिवार को ‘स्थायी नुकसान’ हुआ, फिर भी ऐसा जान पड़ता है कि सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) आंखों पर पट्टी बंधी ‘न्याय की देवी’ की भांति समय-पूर्व रिहाई की याचिका पर फैसला कर रहा है।

उच्च न्यायालय सिंह के उस आवेदन पर विचार कर रहा था जिसमें उसने समय-पूर्व रिहाई के संबंध में अपनी याचिका पर सुनवाई 18 मई से पहले करने का अनुरोध किया था।

न्यायमूर्ति भंभानी ने मौखिक टिप्पणी की, ‘‘ऐसा जान पड़ता है कि एसआरबी जन-धारणा पर आगे बढ़ रहा है। आप बेहद अलोकप्रिय व्यक्ति हैं… एसआरबी आंखों पर पट्टी बंधी न्याय की देवी की भांति चीजों को देख रहा है। आपका नाम अरूचिकर है, इसलिए मैं आपकी याचिका खारिज कर रहा हूं।’’

उच्च न्यायालय ने कहा कि एसआरबी द्वारा दोषियों की समय-पूर्व रिहाई की याचिका खारिज किये जाने के कई अन्य मामले भी उसके पास विचाराधीन हैं। अदालत ने ऐसा कहते हुए सिंह की याचिका को ऐसी ही अन्य याचिकाओं के साथ 20 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

सिंह की ओर से वरिष्ठ वकील मोहित माथुर ने उच्च न्यायालय से कहा कि उनके मुवक्किल ने 31 साल हिरासत में बिताए हैं और इससे पहले जब उसकी समय से पहले रिहाई की मांग खारिज हुई थी, तब अदालत ने इस पर विस्तार से फैसला दिया था, इसके बावजूद सजा समीक्षा बोर्ड ने उसी पुराने कारणों को दोहराते हुए उसकी रिहाई की मांग फिर से अस्वीकार कर दी।

न्यायमूर्ति भंभानी ने कहा कि 41 साल की हिरासत समेत कई ‘बदतर मामले’ हैं, लेकिन एसआरबी अपराध की जघन्यता के कारण संबंधित याचिकाओं को खारिज कर रहा है, जबकि उसे इसके उलट सिफारिशें प्राप्त हो रही हैं।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘आपके साथ तटस्थ एवं न्यायसंगत फैसला किया जाएगा। मैं जो भी उचित समझूंगा, उसके अनुसार ही निर्णय किया जाएगा।’’

सिंह ने अपनी याचिका में एसआरबी के 27 नवंबर, 2025 के फैसले को चुनौती दी है। एसआरबी ने समय-पूर्व रिहाई के उसके अनुरोध को खारिज कर दिया था।

मट्टू के भाई के वकील ने सुनवाई जल्दी करने संबंधी याचिका का विरोध किया और कहा कि दोषी ने गंभीर अपराध किया है।

जनवरी 1996 में 25-वर्षीय मट्टू के साथ बलात्कार किया गया था और उसकी हत्या कर दी गई थी। दिल्ली विश्वविद्यालय के कानून के छात्र सिंह को अधीनस्थ अदालत ने तीन दिसंबर, 1999 को इस मामले में बरी कर दिया था, लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने 27 अक्टूबर, 2006 को निचली अदालत के फैसले को पलट दिया तथा उसे बलात्कार और हत्या का दोषी ठहराया एवं मृत्युदंड सुनाया।

पूर्व आईपीएस अधिकारी के बेटे सिंह ने अपनी दोषसिद्धि और मौत की सजा को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।

उच्चतम न्यायालय ने अक्टूबर 2010 में सिंह की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था, लेकिन उसके मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया था।

उच्च न्यायालय ने एक जुलाई, 2025 को एसआरबी के उस फैसले को दरकिनार कर दिया, जिसमें समय-पूर्व रिहाई के सिंह के अनुरोध को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने कहा था कि उसमें सुधार की गुंजाइश है। इसके बाद अदालत ने सिंह की अर्जी को फिर से विचार करने के लिए एसआरबी के पास वापस भेज दिया था।

भाषा राजकुमार पवनेश सुरेश

सुरेश


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