अदालत ने वरदराजन के पीआईओ दर्जे से संबंधित केंद्र के फैसले को रद्द करने का आदेश वापस लिया
अदालत ने वरदराजन के पीआईओ दर्जे से संबंधित केंद्र के फैसले को रद्द करने का आदेश वापस लिया
नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्र के उस फैसले को रद्द करने का अपना आदेश वापस ले लिया, जिसमें ‘द वायर’ के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन के ‘भारतीय मूल के व्यक्ति’ (पीआईओ) के दर्जे को बदलकर प्रवासी भारतीय नागरिक (ओसीआई) करने के अनुरोध को खारिज कर दिया गया था।
अदालत ने कहा कि वरदराजन पहली नजर में तथ्यों को छिपाने के दोषी हैं।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने 13 मई का अपना वह आदेश भी वापस ले लिया, जिसमें अधिकारियों से अमेरिकी नागरिक के ‘रिटर्न वीजा’ के लिए किए गए आवेदन पर विचार करने और उन्हें 14 से 19 मई के बीच एस्टोनिया की यात्रा करने की इजाजत देने के लिए कहा गया था।
न्यायमूर्ति कौरव ने कहा कि पत्रकार वरदराजन ने 2020 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश के बारे में नहीं बताया, जिसमें उन्हें एक आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत दी गई थी और पासपोर्ट जमा करने तथा संबंधित अधीनस्थ अदालत की इजाजत के बिना विदेश यात्रा पर रोक लगाने जैसी शर्तें लगाई गई थीं।
उन्होंने कहा कि हमेशा यह माना जाता है कि याचिकाकर्ता पूरी जानकारी के साथ अदालत में आता है। न्यायमूर्ति कौरव ने वरदराजन को नोटिस जारी करते हुए उनसे सात कार्यदिवस में हलफनामा दायर कर अपने आचरण पर स्पष्टीकरण देने को कहा।
अदालत ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता की अब तक की पूरी दलीलों को देखने पर, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के याचिकाकर्ता को दिए गए जरूरी निर्देशों का कहीं भी पता नहीं चलता है। उचित तो यह है कि याचिकाकर्ता को उस पहलू के बारे में सच-सच बताना चाहिए था। अदालत की प्रथम दृष्टया राय है कि याचिकाकर्ता तथ्यों को छिपाने के दोषी हैं।’’
इसने निर्देश दिया कि रिट याचिका में अदालत द्वारा दिए गए सभी आदेश वापस लिए जाते हैं।
वरदराजन की ओर से वकील ने अदालत से माफी मांगते हुए कहा कि आदेश की बात उनके दिमाग से निकल गई थी।
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ मिली सामग्री ‘‘परेशान करने वाली’’ है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 12 मई को केंद्र सरकार के उस फैसले को रद्द करते हुए वरदराजन को राहत दी थी, जिसमें उनके ‘भारतीय मूल के निवासी’ (पीआईओ) दर्जे को ‘प्रवासी भारतीय नागरिक’ (ओसीआई) में बदलने का अनुरोध खारिज कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार के इनकार करने में कोई कारण नहीं बताया गया।
पत्रकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि वह पीआईओ कार्ड धारक हैं और वर्ष 2015 के बाद सभी पीआईओ कार्ड स्वतः ही ओसीआई कार्ड माने गए थे, लेकिन उनका पीआईओ कार्ड पढ़ने योग्य नहीं रह गया, जिसके कारण उन्हें इसे ओसीआई में बदलने के लिए आवेदन करना पड़ा।
भाषा वैभव मनीषा नेत्रपाल
नेत्रपाल

Facebook


