Captains Sacked After IPL 2026: हटाए जा सकते हैं इन 3 टीमों के कप्तान, इस वजह से एक्शन की तैयारी में फ्रेंचाइजी, अंतरराष्ट्रीय मैचों में दिखा चुके हैं अपना जलवा

हटाए जा सकते हैं इन 3 टीमों के कप्तान, इस वजह से एक्शन की तैयारी में फ्रेंचाइजी, Captains Sacked After IPL 2026

Captains Sacked After IPL 2026: हटाए जा सकते हैं इन 3 टीमों के कप्तान, इस वजह से एक्शन की तैयारी में फ्रेंचाइजी, अंतरराष्ट्रीय मैचों में दिखा चुके हैं अपना जलवा

Captains Sacked After IPL 2026. Image Source- IBC24

Modified Date: May 14, 2026 / 04:35 pm IST
Published Date: May 14, 2026 3:45 pm IST
HIGHLIGHTS
  • IPL 2026 के बाद अक्षर पटेल, अजिंक्य रहाणे और ऋषभ पंत की कप्तानी खतरे में।
  • दिल्ली, लखनऊ और केकेआर प्लेऑफ की दौड़ में पिछड़ीं।
  • खराब स्ट्राइक रेट और कमजोर टीम रणनीति बनी बड़ी वजह।

नई दिल्लीः Captains Sacked After IPL 2026: इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में निराशाजनक अभियान के कारण तीन फ्रेंचाइजी के कप्तानों को इस महीने के अंत में सत्र के समापन के बाद अपने पद से हाथ धोना पड़ सकता है। अलग अलग फ्रेंचाइजी के उतार चढ़ाव पर नजर रखने वाले सूत्रों ने इसका संकेत दिया है। अक्षर पटेल, अजिंक्य रहाणे और ऋषभ पंत ने लगातार दो सत्र में अपनी टीम की कप्तानी की है लेकिन अपनी टीम को प्लेऑफ में ले जाने की कोशिश में बुरी तरह नाकाम रहे हैं।

Captains Sacked After IPL 2026: आधिकारिक रूप से अभी सिर्फ लखनऊ सुपर जायंट्स ही टूर्नामेंट से बाहर हुई है जिससे पंत लगातार दो सत्र में खराब प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी रहे हैं, लेकिन सभी व्यावहारिक वजहों से रहाणे की अगुआई वाली कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) और अक्षर की कप्तानी वाली दिल्ली कैपिटल्स के भी लीग के आखिरी दौर में बने रहने की उम्मीद कम है। कप्तान और खिलाड़ी के तौर पर अक्षर के का प्रदर्शन खराब रहा है, उन्होंने नौ पारियों में 112.50 के स्ट्राइक-रेट से महज 100 रन बनाए हैं जिसमें से 56 रन एक पारी में और बाकी 44 रन आठ पारियों में बने हैं। यह जब है तब उन्होंने ज्यादातर में शीर्ष पांच में बल्लेबाजी की है। इन 12 मैच में अक्षर ने केवल 36 ओवर गेंदबाजी की है जो तीन ओवर प्रति मैच हैं जिसमें उन्होंने 8.05 के इकोनोमी रेट से 10 विकेट झटके हैं। हालांकि साथी स्पिनर कुलदीप यादव का इकोनोमी रेट और भी खराब है।

आईपीएल सूत्र ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, ‘‘अक्षर अपनी कप्तानी की काबिलियत साबित करने में पूरी तरह विफल रहे हैं और ज्यादातर फैसले लेने के लिए हेमांग बदानी और वेणुगोपाल राव पर निर्भर हैं। ऐसे में अगर वह अगले साल भी कप्तान बने रहते हैं तो यह एक चमत्कार होगा। ’’ सूत्र ने कहा, ‘‘पूरे कोचिंग स्टाफ को भी रिटेन किए जाने की उम्मीद कम है। ’’ 2027 में होने वाली मेगा नीलामी में अक्षर को बतौर खिलाड़ी रिटेन किया जा सकता है। लेकिन अब तक कप्तानी में उनका प्रदर्शन फीका ही रहा है। पंत ने अलग-अलग स्थान पर बल्लेबाजी करने की कोशिश की है लेकिन अक्सर ऐसा लगा है कि वह अपने कंधों पर काफी बोझ उठाए हुए हैं। एक फ्रेंचाइजी के लिए तुरंत नतीजे मिलना आम बात है, लेकिन लगातार दो सत्र के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाना लखनऊ सुपर जायंट्स के मालिक संजीव गोयंका को शायद ही पसंद आए। गोयंका को ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है जो मनचाही कीमत देने को तैयार है लेकिन वह ऐसे व्यक्ति भी हैं जो ऐसे प्रदर्शन की मांग करते हैं जो मेहनताने के साथ सही साबित हो सकें।

पंत के 138 के स्ट्राइक-रेट से 251 रन टी20 के आधुनिक मानकों के हिसाब से खराब ही हैं। उन पर दबाव है इस बात से पता चलता है कि उन्होंने 11 मैचों में सिर्फ नौ छक्के लगाए हैं। उनके बल्ले की लय भी गायब है और टीम संयोजन के कुछ फैसलों ने टीम के समर्थकों को भी हैरान कर दिया है। वहीं केकेआर में रहाणे की नियुक्ति काफी हद तक ‘कोई विकल्प नहीं’ होने के कारण हुआ मामला था क्योंकि फ्रेंचाइजी के पास भरोसेमंद कप्तान के विकल्प की कमी थी। वहीं उनके मुंबई के पूर्व साथी अभिषेक नायर मुख्य कोच थे। हालांकि केकेआर इस बात से परेशान था कि अंगकृष रघुवंशी आधुनिक टी20 क्रिकेट में शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों की मांग के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाए। रघुवंशी ने 139 से ज्यादा के स्ट्राइक-रेट से 340 रन बनाए जबकि कप्तान रहाणे ने 133 के स्ट्राइक-रेट से 237 रन बनाए। दोनों ने शीर्ष तीन में बल्लेबाजी की जिससे लगभग हर मैच में शुरूआती लय धीमी रही। दोनों ने 11 मैचों में मिलकर सिर्फ 25 छक्के लगाए। रहाणे और रघुवंशी को तो एक ही अंतिम एकादश में साथ नहीं खेलना चाहिए था और प्रबंधन की जिद फ्रेंचाइजी के लिए महंगी साबित हुई।

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लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।