यदि आरोपी को कोई आपत्ति न हो तो न्यायालय देशद्रोह के मुकदमे चला सकते हैं : उच्चतम न्यायालय

यदि आरोपी को कोई आपत्ति न हो तो न्यायालय देशद्रोह के मुकदमे चला सकते हैं : उच्चतम न्यायालय

यदि आरोपी को कोई आपत्ति न हो तो न्यायालय देशद्रोह के मुकदमे चला सकते हैं : उच्चतम न्यायालय
Modified Date: May 21, 2026 / 04:06 pm IST
Published Date: May 21, 2026 4:06 pm IST

नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि अदालतें देशद्रोह से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए से जुड़े मुकदमों की सुनवाई कर सकती हैं, यदि आरोपी को इस पर कोई आपत्ति नहीं है।

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने देशद्रोह से संबंधित एक मामले में 17 वर्षों से जेल में बंद एक आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह स्पष्टीकरण दिया।

आरोपी द्वारा दायर अपील मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में लंबित है।

पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता की शिकायत यह है कि यदि उसकी आपराधिक अपील की पूरी सुनवाई की जाए, जिसमें धारा 124ए के तहत आरोप भी शामिल हो, तो उसे कोई आपत्ति नहीं है। ऐसे में, हम स्पष्ट करते हैं… कि जहां भी आरोपी को मुकदमे, अपील या किसी अन्य कार्यवाही के खिलाफ कोई आपत्ति नहीं है, जिसमें उस पर धारा 124ए आईपीसी के तहत भी आरोप पत्र दाखिल किया गया है, तो न्यायालयों को ऐसे मामलों में गुण-दोष और कानून के अनुसार निर्णय लेने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।’’

उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय को याचिकाकर्ता की अपील पर सुनवाई करने और गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने का निर्देश दिया।

ग्यारह मई, 2022 को दिए एक ऐतिहासिक आदेश में, उच्चतम न्यायालय ने देशद्रोह से संबंधित दंडात्मक प्रावधान को तब तक के लिए स्थगित कर दिया था जब तक कि केंद्र सरकार औपनिवेशिक काल के इस कानून की अपनी समीक्षा पूरी नहीं कर लेती। साथ ही न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों से इस अपराध का हवाला देते हुए कोई भी नया मामला दर्ज न करने को कहा था।

भाषा शफीक मनीषा

मनीषा


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