माकपा ने एम के मुनीर के चुनाव से बाहर रहने में जमात-ए-इस्लामी की भूमिका का दावा किया

माकपा ने एम के मुनीर के चुनाव से बाहर रहने में जमात-ए-इस्लामी की भूमिका का दावा किया

माकपा ने एम के मुनीर के चुनाव से बाहर रहने में जमात-ए-इस्लामी की भूमिका का दावा किया
Modified Date: March 27, 2026 / 03:50 pm IST
Published Date: March 27, 2026 3:50 pm IST

कोझिकोड (केरल), 27 मार्च (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता और सीटू के राष्ट्रीय महासचिव ई करीम ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि आईयूएमएल नेता एम के मुनीर को नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों में जमात-ए-इस्लामी के हस्तक्षेप के कारण उम्मीदवार नहीं बनाया गया।

माकपा चुनाव प्रचार के दौरान संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और जमात-ए-इस्लामी के बीच जुड़ावों का आरोप लगाती रही है।

हालांकि, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) का कहना है कि मुनीर स्वास्थ्य कारणों से चुनावी मैदान से दूर हैं।

‘सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन’ (सीटू) महासचिव करीम ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मुनीर आईयूएमएल के प्रमुख नेता हैं और चुनावों में उनकी अनुपस्थिति का कारण केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं नहीं हो सकती हैं।

करीम ने कहा, ‘‘उनके रुख से मुस्लिम लीग के नेतृत्व को असुविधा हो सकती है। उन्होंने जमात-ए-इस्लामी की राजनीति पर एक किताब लिखी है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि जमात-ए-इस्लामी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तरह धर्म-आधारित राजनीति पर टिकी है।

करीम ने दावा किया कि जमात-ए-इस्लामी मुस्लिम लीग और यूडीएफ के साथ समन्वय में चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘मुनीर समेत मुस्लिम लीग के नेताओं ने अतीत में जमात-ए-इस्लामी का कड़ा विरोध किया है। यह जांच होनी चाहिए कि ऐसे नेता को चुनाव लड़ने से किसने रोका।’’

मुनीर यूडीएफ सरकारों में दो बार मंत्री रह चुके हैं। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने कोडुवल्ली निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था और एलडीएफ उम्मीदवार करात रजाक को हराया।

भाषा आशीष देवेंद्र

देवेंद्र


लेखक के बारे में