माकपा महासचिव का सीईसी को पत्र: लाखों नाम हटाया जाना चिंताजनक, दखल दे आयोग

माकपा महासचिव का सीईसी को पत्र: लाखों नाम हटाया जाना चिंताजनक, दखल दे आयोग

माकपा महासचिव का सीईसी को पत्र: लाखों नाम हटाया जाना चिंताजनक, दखल दे आयोग
Modified Date: April 9, 2026 / 05:12 pm IST
Published Date: April 9, 2026 5:12 pm IST

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर शुक्रवार को चिंता जताई और निर्वाचन आयोग से तत्काल दखल देने का आग्रह किया।

पार्टी के महासचिव एम.ए. बेबी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे पत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ी वर्तमान स्थिति पर ‘दुख, गहरी चिंता और कड़ा विरोध’ जताया।

वाम नेता ने कुछ खबरों का हवाला देते हुए कहा कि 90 लाख से ज़्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का लगभग 12 प्रतिशत है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हटाए गए कई लोगों को ‘‘विवेचनाधीन’’ वाली श्रेणी में डाल दिया गया, जबकि शिकायत निवारण तंत्र से लोगों का संपर्क नहीं हो पा रहा है तथा त्वरित ढंग से काम भी नहीं हो रहा है।

बेबी का कहना है कि एसआईआर की प्रक्रिया सामान्य प्रशासनिक स्तर पर मतदाता सूची को शुद्ध करने से कहीं आगे निकल गई और इसके बजाय यह ‘‘बड़े पैमाने पर लोगों को वोट के अधिकार से वंचित करने की एक सुनियोजित प्रक्रिया’ बन गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर की प्रक्रिया के तहत ‘मनमाने मानदंड’ अपनाए गए और ‘पारदर्शी, ज़मीनी स्तर पर सत्यापन’ की जगह ‘‘एल्गोरिद्म के आधार पर नाम हटाया जाना’’ चिंताजनक है।

पत्र में कहा गया है, ‘‘मतदाता को एक संदिग्ध के तौर पर देखा गया और खुद को निर्दोष साबित करने का बोझ उसी पर डाल दिया गया।’’

माकपा महासचिव का कहना है कि इस प्रक्रिया के दौरान लोगों को आर्थिक नुकसान, असुविधा, मानसिक आघात का सामना करना पड़ा और यहां तक ​​कि कई लोगों की मौत भी हुई है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह नाम हटाना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मतदान के अधिकार की संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन है।

भाषा हक हक वैभव

वैभव


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