रास में माकपा सदस्य ने सार्वजनिक बैंकों में तनावपूर्ण परिस्थितियों पर चिंता जताई

रास में माकपा सदस्य ने सार्वजनिक बैंकों में तनावपूर्ण परिस्थितियों पर चिंता जताई

रास में माकपा सदस्य ने सार्वजनिक बैंकों में तनावपूर्ण परिस्थितियों पर चिंता जताई
Modified Date: February 12, 2026 / 01:14 pm IST
Published Date: February 12, 2026 1:14 pm IST

नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) राज्यसभा में केरल से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) सदस्य ए ए रहीम ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाजी परिस्थितियों को लेकर बृहस्पतिवार को गंभीर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि पिछले दशक में काम से संबंधित तनाव, उत्पीड़न और कार्यस्थल पर दुर्व्यवहार के कारण लगभग 500 बैंक कर्मचारियों ने आत्महत्या कर ली।

उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए रहीम ने बताया कि कई बैंक कर्मचारी बढ़ते कार्यभार और “असंभव लक्ष्यों” को सहन न कर पाने के कारण आत्महत्या करने पर मजबूर हुए। उन्होंने गुजरात के एक कर्मचारी का हवाला दिया, जिसने अपने वरिष्ठ अधिकारी को फोन पर कथित तौर पर कहा था, “मैं अब यह सहन नहीं कर पा रहा, मेरी जीने की इच्छा खत्म हो गई है,” और फिर उसने आत्महत्या कर ली।

रहीम ने 2021 से 2024 के बीच की कुछ घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यूनियन बैंक के एक मुख्य प्रबंधक ने आत्महत्या की और अपने ‘सुसाइड नोट’ में लिखा कि “कर्मचारियों को असंभव लक्ष्य नहीं दिए जाने चाहिए।” उनके अनुसार, तमिलनाडु में एक शाखा प्रबंधक ने आत्महत्या की जिसका बच्चा एक साल का था। केरल के कन्नूर में 38 वर्षीय बैंक प्रबंधक ने बैंक में फांसी लगाने से पहले लिखा “मैं कार्य का दबाव सहन नहीं कर पा रही हूँ।”

रहीम ने कहा, “यह सूची लंबी है। बैंक कर्मचारी थकान, अधिक कार्यभार और स्टाफ की कमी से लगातार जूझ रहे हैं।” उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में रात में भी कर्मचारी काम करते देखे जा सकते हैं।

उन्होंने लोकसभा में उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जून 2025 तक केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ही 32,567 पद खाली थे। उन्होंने कहा, “बैंकों की शाखाओं और व्यवसाय की संख्या बढ़ रही है, लेकिन कर्मचारियों की संख्या घट रही है।”

रहीम ने आरोप लगाया कि भारतीय सार्वजनिक बैंकिंग क्षेत्र का मूल दायित्व सामान्य लोगों के लिए वित्तीय लेनदेन को आसान बनाना और उनकी वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है लेकिन यह अब “भारतीय और विदेशी कंपनियों के तृतीय-पक्ष उत्पादों के लिए एक बाजार” बन गया है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को निजी बीमा, म्यूचुअल फंड और सरकारी योजनाओं जैसे अटल पेंशन योजना और कन्या समृद्धि योजना से संबंधित अवास्तविक लक्ष्य दिए जा रहे हैं।

रहीम ने कहा, “कई कर्मचारियों को रोजाना का लक्ष्य पूरा किए बिना रात में बैंक छोड़ने की अनुमति नहीं है।”

उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

भाषा मनीषा अविनाश

अविनाश


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