जन सुरक्षा के मद्देनजर पायलट की थकान से जुड़े मानदंडो को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता: अदालत

जन सुरक्षा के मद्देनजर पायलट की थकान से जुड़े मानदंडो को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता: अदालत

जन सुरक्षा के मद्देनजर पायलट की थकान से जुड़े मानदंडो को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता: अदालत
Modified Date: January 28, 2026 / 05:37 pm IST
Published Date: January 28, 2026 5:37 pm IST

नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि पायलट की थकान से जुड़े डीजीसीए के नियमों का अनुपालन न किए जाने के कारण जन सुरक्षा को लेकर उत्पन्न चिंताओं को ”नजरअंदाज” नहीं किया जा सकता है।

मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने डीजीसीए के पांच दिसंबर 2025 के फैसले के खिलाफ दाखिल एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने इस फैसले के तहत पायलटों के लिए अनिवार्य थकान प्रबंधन नियमों में ढील प्रदान की थी।

यह जनहित याचिका हाल ही में इंडिगो की उड़ान संचालन में बड़े पैमाने पर हुई बाधा को ध्यान में रखते हुए दायर की गई थी।

पीठ ने मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार के लिए सूचीबद्ध की और डीजीसीए के वकील को निर्देश प्राप्त करने को कहा।

पायलटों के लिए नए उड़ान-ड्यूटी मानदंडों को लागू करने के लिए एयरलाइन की पर्याप्त तैयारी न होने के कारण इंडिगो ने दिसंबर के पहले सप्ताह में देशभर में सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दी थीं।

डीजीसीए ने पांच दिसंबर, 2025 को उड़ान ड्यूटी समय सीमा (एफडीटीएल) में छूट दी ताकि इंडिगो अधिक पायलट को ड्यूटी पर तैनात कर सके और व्यवधानों को कम करके परिचालन को सामान्य कर सके।

विमानन नियामक ने साप्ताहिक विश्राम अवधि के बदले छुट्टी लेने की अनुमति देकर उड़ान-ड्यूटी के नियमों में ढील दी है।

बुधवार को एयरलाइन के वकील ने कहा कि पायलटों द्वारा दायर एक याचिका पहले से ही उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश पीठ के समक्ष लंबित है और जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।

हालांकि, अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता एक पूर्व विमान अभियंता है और यह मुद्दा आम जनता की सुरक्षा से जुड़ा है।

अदालत ने कहा, ‘इस चिंता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।’

पीठ ने कहा, “इसका यात्रियों की सुरक्षा से सीधा संबंध है। जब तक नियमों को चुनौती नहीं दी जाती या उनमें कोई खामी नहीं पाई जाती, उन्हें लागू करना होगा। नियम कब से लागू हैं लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा था। हम नियमों के औचित्य पर विचार नहीं कर रहे हैं। जब नियम लागू हैं, तो संशोधन होने तक इसका पालन किया जाना अनिवार्य है।”

हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि याचिकाएं कभी-कभी नियामकों पर दबाव बनाती हैं और वे उसके आगे झुक जाते हैं।

अदालत ने डीजीसीए के वकील से कहा, “हम इस पर कल सुनवाई करेंगे। कृपया निर्देश लेकर आइए।”

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि थकान संबंधी नियमों में ढील अवैध रूप से केवल इंडिगो को दी गई और यह प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण है।

हालांकि, अदालत ने कहा कि ढील से संबंधित अधिसूचना सभी एयरलाइनों पर लागू होती है।

याचिका में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) के तहत डीजीसीए का दायित्व है कि वह पायलटों के थकान संबंधी नियमों को समान रूप से लागू करे, असुरक्षित रोस्टरिंग रोके, पर्याप्त कर्मचारी सुनिश्चित करे, एयरलाइनों की तैयारी का आकलन करे और नियमों का उल्लंघन करने वाले उड़ान कार्यक्रमों को निलंबित करे।

भाषा राखी पवनेश

पवनेश


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