साइबर धोखाधड़ी: ईडी मामले में सीए की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

साइबर धोखाधड़ी: ईडी मामले में सीए की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

साइबर धोखाधड़ी: ईडी मामले में सीए की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
Modified Date: February 18, 2026 / 04:16 pm IST
Published Date: February 18, 2026 4:16 pm IST

नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को 640 करोड़ रुपये के साइबर धोखाधड़ी मामले से जुड़ी धनशोधन जांच में एक सनदी लेखाकार (सीए) को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें भास्कर यादव को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया था और उन्हें 10 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया था।

उच्च न्यायालय ने दो फरवरी को यादव और एक अन्य सनदी लेखाकार अशोक कुमार शर्मा की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

उच्च न्यायालय ने 22 पन्नों के अपने फैसले में कहा था कि धनशोधन का एक जटिल जाल बना हुआ है और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दोनों आरोपियों से हिरासत में पूछताछ करने की आवश्यकता जताना अनुचित नहीं है।’’

अदालत ने कहा, “आरोपी/याचिकाकर्ता, कुशल पेशेवर होने के नाते, कथित तौर पर अपराध की आय का कई स्तरों पर शोधन करने में सफल रहे हैं, और इसे उजागर करने के लिए, प्रवर्तन निदेशालय के सुविज्ञ वकील द्वारा प्रस्तुत इस तर्क में मुझे दम नजर आता है कि हिरासत में पूछताछ अत्यंत आवश्यक है।”

ईडी ने पहले एक बयान में कहा था कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज की गई दो प्राथमिकी के आधार पर धनशोधन की जांच शुरू की गई है। ये प्राथमिकी सट्टेबाजी, जुआ, अंशकालिक नौकरियों और ऑनलाइन ठगी (फिशिंग) घोटालों के माध्यम से उत्पन्न 640 करोड़ रुपये के साइबर धोखाधड़ी के आरोपों की जांच के लिए दर्ज की गई थीं।

जांच एजेंसी के अनुसार, कथित घोटाला कुछ सनदी लेखाकार, कंपनी सेक्रेटरी और क्रिप्टो (करेंसी) व्यापारियों के एक गठजोड़ के माध्यम से चलाया जा रहा था, जो अपराध की कमाई को वैध बनाने के लिए मिलकर काम करते थे।

भाषा

प्रशांत सुरेश

सुरेश


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