डीडीए ने मास्टर प्लान दिल्ली 2047 को मंजूरी दी, 2041 की समयसीमा बढ़ायी गयी

डीडीए ने मास्टर प्लान दिल्ली 2047 को मंजूरी दी, 2041 की समयसीमा बढ़ायी गयी

डीडीए ने मास्टर प्लान दिल्ली 2047 को मंजूरी दी, 2041 की समयसीमा बढ़ायी गयी
Modified Date: August 12, 2026 / 06:41 pm IST
Published Date: August 12, 2026 6:41 pm IST

नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने बुधवार को शहर के सुनियोजित विकास के उद्देश्य से निर्मित ‘दिल्ली मास्टर प्लान 2047’ को मंजूरी दी। यह जानकारी अधिकारियों ने दी।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए संधू ने प्राधिकरण द्वारा बनाई गई पुरानी दो-मंजिला रिहायशी इकाइयों के पुनर्विकास के लिए एक समान नीति लाने का भी फैसला किया।

डीडीए ने कहा, ‘‘ 2047 तक दिल्ली की जनसंख्या में काफी बढ़ोतरी होने के अनुमान को देखते हुए, मास्टर प्लान में आवास, आर्थिक विकास, आवागमन, पर्यावरण की स्थिरता, बुनियादी ढांचे, विरासत के संरक्षण, शहरी पुनर्विकास और नागरिकों पर केंद्रित शासन-व्यवस्था के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया गया है।’’

डीडीए ने बताया कि एमपीडी (दिल्ली मास्टर प्लान) 2021 के खत्म होने के बाद पहले वह एमपीडी 2041 पर काम कर रहा था, लेकिन अब इसे बदलकर ‘एमपीडी 2047’ कर दिया गया है ताकि यह केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत 2047’ की दृष्टि के अनुरूप हो सके।

प्राधिकरण ने एक बयान में कहा, ‘‘ अब यह योजना अंतिम मंजूरी एवं फिर अधिसूचना के लिए भारत सरकार के आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय के पास भेजी जायेगी ।’’

दिल्ली के लिए पहले मास्टर प्लान की 1957 के दिल्ली विकास अधिनियम के तहत 1962 में उद्घोषणा की गयी थी। उसके बाद 2001 और 2021 के मास्टर प्लान आए।

ये योजनाएं 20 साल की भावी अवधि के लिए तैयार की गईं और इन्होंने राष्ट्रीय राजधानी के नियोजित विकास के लिए एक रूपरेखा प्रदान की।

नये मास्टर प्लान में मंजूर किए गए अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों में पुरानी आवासीय इमारतों का एकसमान पुनर्विकास शामिल है।

प्राधिकरण ने कहा, ‘‘एमपीडी-1962 के तहत बनी डीडीए की कई पुरानी आवास योजनाओं में अलग-अलग भूखंडों पर बनी दो मंज़िला इमारतें शामिल हैं, जो 50 साल से ज़्यादा पुरानी हैं और बनावट के लिहाज से कमजोर हैं। जहां खाली रिहायशी भूखंड के लिए मौजूदा एमपीडी नियमों के तहत पुनर्विकास के स्पष्ट दिशानिर्देश हैं, वहीं बनी-बनाई दो मंज़िला इमारतों के लिए कोई एक जैसा नियम नहीं था।’’

डीडीए ने कहा कि इस मंज़ूरी के साथ, अब बनी-बनाई दो मंज़िला इमारतों को भी खाली रिहायशी भूखंड की तरह ही पुनर्विकास के अधिकार मिल गए हैं।

भाषा

राजकुमार अमित

अमित


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