मोदी-मैक्रों वार्ता के दौरान रक्षा और परमाणु ऊर्जा केंद्र में रहने के आसार

मोदी-मैक्रों वार्ता के दौरान रक्षा और परमाणु ऊर्जा केंद्र में रहने के आसार

मोदी-मैक्रों वार्ता के दौरान रक्षा और परमाणु ऊर्जा केंद्र में रहने के आसार
Modified Date: June 11, 2026 / 08:59 pm IST
Published Date: June 11, 2026 8:59 pm IST

नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच होने वाली उच्च-स्तरीय बातचीत में रक्षा, असैन्य परमाणु ऊर्जा, नवोन्मेष और जटिल प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करना मुख्य एजेंडा होगा।

मोदी शनिवार से फ्रांस और स्लोवाकिया की एक हफ्ते की यात्रा पर रवाना होंगे। फ्रांस में, वह जी-7 सम्मेलन के संपर्क सत्र में हिस्सा लेंगे और मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी का जी-7 सम्मेलन के दौरान कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने का कार्यक्रम है। माना जा रहा है भारत और अमेरिका प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बैठक की संभावना पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इस बारे में अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।

प्रधानमंत्री की फ्रांस यात्रा से पहले, राजनयिक सूत्रों ने बताया कि कई फ्रांसीसी कंपनियां असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में मौकों को तलाशने में गहरी दिलचस्पी ले रही हैं। उन्होंने बताया कि यह घटनाक्रम भारत द्वारा ‘शांति’कानून (भारत के रूपांतरण हेतु परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन एवं विकास अधिनियम) लागू किए जाने के बाद इसमें मौजूद बड़ी संभावनाओं के मद्देनजर हो रहा है।

भारत की योजना 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को मौजूदा 8.78 गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट करने की है।

सूत्रों के मुताबिक फ्रांस ‘मेक-इन-इंडिया’ के तहत बहु भूमिका लड़ाकू विमान (एफआरएफए) परियोजना को आगे बढ़ाने पर विचार कर रहा है और इन लड़ाकू विमानों में भारतीय हथियार प्रणालियों को शामिल करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि एफआरएफए परियोजना के तहत, फ्रांस की प्रमुख रक्षा कंपनी दसॉल्ट एविएशन 18 राफेल लड़ाकू विमान ‘तैयार हालत’ में आपूर्ति करेगी और बाकी विमान भारत में लगभग 50 प्रतिशत स्वदेशी पुर्जों के साथ बनाए जाएंगे।

सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान भारत और फ्रांस के बीच 12 नई द्विपक्षीय पहल शुरू किए जाने की संभावना है।

प्रधानमंत्री मोदी सबसे पहले 14 जून को राष्ट्रपति मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक के लिए फ्रांस के बंदरगाह शहर नीस जाएंगे।

दोनों नेता मिलकर ‘भारत इनोवेट्स’ का उद्घाटन करेंगे। यह तीन दिन का कार्यक्रम ‘भारत-फ्रांस नवोन्मेष वर्ष’ के तहत आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों और केंद्र सरकार से वित्त प्राप्त करने वाले तकनीकी संस्थानों के भारतीय प्रौद्योगिकी उपक्रमों को प्रदर्शित करना है।

मोदी नीस से 14-16 जून के दौरान राजकीय यात्रा पर स्लोवाकिया जाएंगे।

प्रधानमंत्री 16-17 जून को जी-7 शिखर सम्मेलन के संपर्क सत्रों में शामिल होने के लिए फ्रांस लौटेंगे।

मोदी अपनी यात्रा के आखिरी चरण में 18 जून को पेरिस जाएंगे। वहां वह द्विपक्षीय बातचीत करेंगे और यूरोप के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप आयोजन ‘विवटेक समिट’ में शामिल होंगे।

विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि जी-7 सम्मेलन में मोदी का ध्यान ‘ग्लोबल साउथ’ की प्राथमिकताओं, चिंताओं और विकास से जुड़ी आकांक्षाओं को प्रमुखता से सामने लाने पर होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘इन चर्चाओं में मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और विकास के लिए एकजुटता को फिर से मज़बूत करने तथा साझा और संतुलित विकास को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाएगा। जी7 शिखर सम्मेलनों में भारत की नियमित भागीदारी भारत की भूमिका की बढ़ती मान्यता को दर्शाती है।’’

उम्मीद की जा रही है कि जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले नेताओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय बातचीत में पश्चिम एशिया के संघर्ष के आर्थिक असर (जिसमें ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाला असर भी शामिल है) पर भी चर्चा होगी।

जी-7 दुनिया की सात सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका का साझा मंच है। यूरोपीय संघ भी इस समूह का सदस्य है।

भाषा धीरज माधव

माधव


लेखक के बारे में